इंटरनेट क्या है इसके लाभ और हानि – What is Internet in Hindi



हम इस आर्टिकल में जानेंगे इंटरनेट क्या है (What is Internet in Hindi) इसके लाभ और हानि, इंटरनेट क्या है इसकी विशेषताएं, इंटरनेट की खोज किसने की, वर्ल्ड वाइड वेब क्या है? इंटरनेट की कार्य प्रणाली इंटरनेट के उपयोग (Use of Internet) इंटरनेट से जुड़ना, जावा स्क्रिप्ट (Java Script), पीएचपी (PHP), एचटीएमएल (HTML).

इंटरनेट कनेक्शन के लिए कुछ बुनियादी जरूरतें निम्न हैं-

  • कनेक्शन, डिवाइस, लैपटॉप, स्मार्टफोन, घड़ी, टेबलेट कंप्यूटर
  • हार्डवेयर जैसे- मोडेम और राउटर
  • इंटरनेट कनेक्टिविटी
  • केबल कनेक्टिविटी
  • सैटेलाइट कनेक्ट
  • इंटरनेट सेवा प्रदाता

इंटरनेट क्या है – What is Internet in Hindi

इंटरनेट नेटवर्कों का एक नेटवर्क है। इंटरनेट  विश्व में फैले हुए विभिन्न कंप्यूटर नेटवर्कों के आपस में जुड़ने से बना विश्वव्यापी नेटवर्क है। यह निश्चित प्रोटोकॉल का प्रयोग कर एक कंप्यूटर नेटवर्क से दूसरे कंप्यूटर नेटवर्क तक संपर्क स्थापित करके सूचनाओं का आदान- प्रदान तथा विभिन्न सेवाओं जैसे- e-mail (Electronic Mail), ऑनलाइन बैंकिंग, ऑनलाइन गेमिंग, फाइल ट्रांसफर, ऑनलाइन चैट, इंटरलिंक्ड हाइपर टेक्स्ट दस्तावेज तथा वर्ल्ड वाइड वेब आदि को भी निष्पादित (Execute) करता है।

What is Internet in Hindi
इंटरनेट क्या है (What is Internet in Hindi)

इंटरनेट के द्वारा हम डेटा, चित्र, चल चित्र, टेक्स्ट, ध्वनि आदि को विश्व के किसी भी जगह जहां इंटरनेट की सुविधा हो आसानी से तथा तीव्र गति से भेज या शेयर कर सकते हैं।

इंटरनेट की खोज किसने की?

वर्ष 1962 में सर्वप्रथम इंटरनेट का विचार प्रो. जे. सी. लिक्लाइडर द्वारा दिया गया। अतः प्रो. जे.सी. लिक्लाइडर को इंटरनेट का जनक कहा जाता है। लिक्लाइडर ने इंटरनेट की खोज किसने की।

इंटरनेट का सर्वप्रथम प्रयोग अमेरिका में सेना के लिए किया गया था। अमेरिकन सेना एक अच्छी व विश्वसनीय संचार सेवा चाहती थी। अतः वर्ष 1969 में अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा अर्पानेट (Advance Research Project Agency Network-ARPANET) नाम का एक नेटवर्क बनाया गया, जो विश्व का पहला नेटवर्क कहा जाता है।

अर्पानेट में चार दूरस्थ कंप्यूटरों को परस्पर जोड़ा गया था। इसके द्वारा रक्षा विभाग में अनुसंधान तथा विकास कार्य किया गया। वर्ष 1989 में इंटरनेट को सबके लिए खोल दिया गया।

इंटरनेट की कार्य प्रणाली What is Internet in Hindi

इंटरनेट कई छोटे कंप्यूटरों के नेटवर्क का एक बड़ा नेटवर्क है, जो दुनिया भर में फैला हुआ है। इसमें कई नेटवर्क, केबल, उपग्रह मॉडल युक्तियों की सहायता से आपस में जुड़े है। इंटरनेट पर कार्य करने वाले प्रत्येक कंप्यूटर की एक अलग पहचान होती है, जिससे किसी भी कंप्यूटर को कॉ दूसरे कंप्यूटरों के बीच में पहचाना जा सके।

इंटरनेट पर भी वांछित कंप्यूटर जिससे सूचना प्राप्त करनी है या जिसे सूचना प्रेषित करनी होती है कुछ इसी तरह ही पहुंचा जाता है। जब हम कोई संदेश इंटरनेट पर प्रेषित करना चाहते हैं, तो वह सूचना सर्वप्रथम कंप्यूटर के सबसे नजदीकी सर्वर तक पहुंचती है। इस सर्वर के साथ उपलब्ध राउटर इसे इंटरनेट पते के आधार पर उसके नजदीकी सर्वर को प्रेषित करता है। यहां पर उपलब्ध राउटर पुनः उसे और नजदीकी सर्वर पर प्रेषित कर देता है। यह प्रक्रिया तब तक चलती रहती है, जब तक की सूचना वांछित कंप्यूटर तक नहीं पहुंच जाती है।

सूचना का आदान-प्रदान पैकेटों (कुछ बाइटों का समूह) के रूप में होता है अर्थात सूचना पैकेटों में विभक्त हो जाती है। फिर सर्वर-सर्वर होते हुए वांछित स्थान पर पहुंच जाती है। यहां यह कतई आवश्यक नहीं है कि सभी पैकेट एक ही मार्ग से पहुंचे। सूचना के ये पैकेट जो भी खाली मार्ग उपलब्ध होता है, उसी का उपयोग करते हुए वांछित स्थान पर पहुंच जाते हैं।

(1) सूचना सुरक्षा संचालन केंद्र:- वर्ष 1992 में इंटरनेट से संबंधित मानकों प्रोटोकॉल तथा नीतियों का विकास करने के लिए एक गैर-लाभकारी अंतरराष्ट्रीय संस्थान का गठन किया गया। यह उपयोगकर्ताओं को इंटरनेट के संबंध में शिक्षित करने के लिए विकसित किया गया था

(2) इंटरनेट आर्किटेक्चर बोर्ड:- यह संस्थान सूचना सुरक्षा संचालन केंद्र द्वारा निर्धारित मानकों के अंतर्गत इंटरनेट के लिए आवश्यक तकनीकी और इंजीनियरिंग विकास का कार्य करता है।

(3) इंटरनेट कॉर्पोरेशन फॉर असाइन्ड नेम और नंबर:– वर्ष 1998 में इंटरनेट पर आईपी पता (IP Address) तथा डोमेन नाम (Domain Name) प्रदान करने और उसके मानकों का निर्धारण करने के लिए यह संगठन स्थापित किया गया।

(4) डोमेन नेम रजिस्ट्रार:- इंटरनेट कॉर्पोरेशन फॉर असाइन्ड नेम्स और नंबर्स द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार इंटरनेट के प्रयोग के लिए डोमेन नेम प्रदान करने वाले गैर-सरकारी संस्थाओं को डोमेन नेम रजिस्ट्रार कहते हैं।

(5) इंटरनेट इंजीनियरिंग टास्क फोर्स:- इस संगठन का मुख्य उद्देश्य इंटरनेट मानकों का विकास करना तथा इंटरनेट के उपयोग को बढ़ावा देना है।

(6) वर्ल्ड वाइड वेब कंसोर्टियम:- यह संस्था वर्ल्ड वाइड वेब के प्रयोग के लिए मानकों का निर्धारण करती है। इसका गठन वर्ष 1994 में किया गया था।

इंटरनेट के उपयोग (Use of Internet)

  • शिक्षा और अनुसंधान (Research and Education) :- c Learning, Virtual Classroom.
  • मनोरंजन (Entertainment)
  • ई-कॉमर्स (e-Commerce)
  • ई-प्रशासन (e-Governance)
  • इंटरनेट प्रोटोकॉल टेलीविजन (Internet Protocol Television- IPTV)
  • ई-टेलीफोनी (e-Telephony)
  • न्यूज ग्रुप (News Group)
  • यूज नेट (Use net)
  • वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web)
  • ई-मेल (e-mail)
  • सोशल नेटवर्किंग (Social Networking)
  • टेलनेट या रिमोट लॉग-इन (Telnet Remote Login)
  • वीडियो कॉन्फ्रेसिंग (Video Conference )
  • इंस्टैंट मैसेजिंग (Instant Messaging)
  • चैटिंग (Chatting)

इंटरनेट से जुड़ना – Internet Kiya hai

इंटरनेट से जुड़े कंप्यूटरों को एक विशेष आईपी पता प्रदान किया जाता है, जो उस कंप्यूटर की पहचान बताता है। इंटरनेट सेवा प्रदाता को निर्धारित शुल्क देकर इंटरनेट खाता उपयोगकर्ता नाम (User Name) तथा पासवर्ड (Password) प्राप्त किया जाता है। उपयोगकर्ता नामइंटरनेट से जुड़ने के लिए और पासवर्ड  सुरक्षा व गोपनीयता के लिए आवश्यक होता है। उपयोगकर्ता द्वारा इंटरनेट सेवा (Internet Service) से जुड़ने के लिए निम्नांकित उपकरणों तथा सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है।

(1) माइक्रोप्रोसेसर
(2) रैम (मेमोरी)
(3) हार्ड डिस्क
(4) मॉनिटर
(5) मल्टीमीडिया किट
(6) मॉडम
(7) प्वॉइंटिंग डिवाइस
(8) प्रचालन तंत्र
न्यूनतम 486 अथवा उच्च क्षमता वाला
न्यूनतम 32 मेगाबाइट
न्यूनतम 200 मोगाबाइट रिक्त स्थान
MPEG डिस्प्ले कार्ड + रंगीन मॉनिटर 
सीडी रोम ड्राइव, स्पीकर तथा माइक 
56 किलोबाइट प्रति सेकंड गति वाला
स्क्रॉल माउस (Scroll Mouse)
विंडोज 95 अथवा अन्य उन्नत संस्करण

वर्ल्ड वाइड वेब

वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web) का संक्षिप्त रूप है। वेब को इंटरनेट का पर्याय माना जाता है। इंटरनेट पर हाइपर लिंक द्वारा आपस में जुड़े हुए सूचनाओं के समूह को वेब ब्राउजर की सहायता से प्राप्त किया जा सकता है। वर्ल्ड वाइड एवं वेब भी कहा जाता है। विभिन्न कंप्यूटरों में एकत्रित सूचनाओं को टेक्स्ट डॉक्युमेंट की सहायता अन दूसरे में जोड़ने के लिए वर्ल्ड वाइड वेब सिस्टम का प्रयोग करते हैं। सूचनाओं को एक से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित (Transfer) करने के लिए टेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल (Hyper Text Transfer Protocol) उपयोग किया जाता है।

वर्ल्ड वाइड वेब में प्रयुक्त होने वाली भाषाएं निम्नलिखित है-

जावा स्क्रिप्ट (Java Script)

पीएचपी (PHP)

एवटीएमएल (HTML)

एक्सटेंसिबल मार्कअप लैंग्वेज

एक्सटेंसिबल एचटीएमएल

जावा स्क्रिप्ट (Java Script)

वेब पेज के अभिकल्पन में जावा स्क्रिप्ट का प्रयोग किया जाता है। जावा स्क्रिप्ट एक सॉफ्टवेयर भाषा है, जिसका अभिकल्पन सन यूनी माइक्रोसिस्टम द्वारा किया गया है। यह एक स्क्रिप्ट भाषा है।

पीएचपी (PHP)

पीएचपी (PHP) का विकास वर्ष 1994 में रासमस लेरडोर्फ द्वारा किया गया था। पीएचपी एक सॉफ्टवेयर भाषा है तथा इसका प्रयोग डायनमिक वेब पेज के विकास में किया जाता था। प्रारंभ में पीएचपी (PHP) का पूर्ण रूप पर्सनल होम पेज था तथा बाद में इसका नाम हाइपर टेक्स्ट प्री-प्रोसेसर (Hyper Text Preprocessor) हो गया।

एचटीएमएल (HTML)

एचटीएमएल का पूर्ण रूप हाइपर टैक्स्ट मार्कअप लैंग्वेज है। यह वर्ल्ड वाइड वेब पर वेब पेज के अभिकल्पन (Design) में प्रयोग होने वाली सॉफ्टवेयर भाषा है। एचटीएमएल में हाइपर टेक्स्ट का प्रयोग होता है।

(a) हाइपर टेक्स्ट, कंप्यूटर एवं किसी वेब पेज पर प्रदर्शित वह टेक्स्ट है, जो किसी अन्य वेब पेज पर उपस्थित टेक्स्ट, ग्राफिक्स, चित्र या किसी अन्य युक्ति से जुड़ा रहता है।

(b) हाइपर लिंक (Hyper Link) हापरलिंक, हाइपर टेक्स्ट द्वारा प्रदर्शित टेक्स्ट अथवा आइकन को आपस में जोड़ने की व्यवस्था है। इसे एचटीएमएल भाषा में अभिकल्पित किया गया है। वेब पेज को आपस में जोड़ने के लिए हाइपर लिंक का प्रयोग होता है।

एक्सटेंसिबल मार्कअप लैंग्वेज

एक्सटेंसिबल मार्कअप लैंग्वेज (Extensible Markup Language) का संक्षिप्त रूप एक्सएमएल है। इसका प्रयोग वेब पेज के अभिकल्पन में होता है। इस भाषा में आंकड़ों को संचित करने अथवा उसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर हस्तांतरित करने को प्रमुखता दी जाती है।

एक्सटेंसिबल एचटीएमए

एक्सटेंसिबल एचटीएमएल एक सॉफ्टवेयर भाषा है। इसमें एचटीएमएल तथा एक्सएमएल (HTML and XML) दो भाषाओं की विशेषताएं समाहित होती हैं।

यूनीफॉर्म रिसोर्स लोकेटर (URL)

यूनीफॉर्म रिसोर्स लोकेटर (Uniform Resource Locator)- यूनीफॉर्म रिसोर्स लोकेटर का संक्षिप्त रूप URL है। इसका विकास वर्ष 1994 में टीम बर्नर्स ली तथा इंटरनेट इंजीनियरिंग टास्क फोर्स द्वारा किया गया था। URL को वेब पता भी कहते हैं। किसी वेब साइट अथवा वेब पेज का विशेष पता यूआरएल (URL) कहलाता है।

यूआरएल (URL) के मुख्यतः तीन भाग होते हैं, जो आपस में मिलकर यूआरएल (URL) का निर्माण करते हैं।

(i) प्रोटोकॉल (Protocol)

(ii) होस्ट नाम (Host Name)

(iii) फाइल नाम (File Name तथा File Location)

इंटरनेट का क्रमिक विकास

परंपरागत टेलीफोन नेटवर्क में आंकड़ों की स्थानांतरि करने के लिए सर्किट स्विचिंग तकनीक का प्रयोग किया जाता था। इसमें सेडिंग अथवा उपकरणों के डेडिकेटेड पाथ स्थापित होता था।

ARPA (Advanced Research Projects Agency) में नेटवर्क का अभिकल्पन किया, जो नामक कंपनी विकसित आईएमपी-आईएमपी नामक प्रोटोकॉल का प्रयोग करता था। आईएमपी का पूर्ण रूप इंट मैसेज प्रोसेसर्स है, दिले के नाम से जाना जाता था।

बर्कले स्थित कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय ने TCP/IP प्रोटोकॉल विकसित किया जिसे बरकेली-यूनिक्स- 4.2 BSD (Berkeley Unix – 4.2 BSD) इंटीग्रेट किया गया।

वर्ष 1983 में MILNET के नाम से ARPANET से प्रबंधन कारण से अलग कर एक सबनेट (Subnet) के रूप में स्थापित किया गया। नेटवर्क (Network) की बढ़ती संख्या के कारण मशीनों को व्यवस्थित करने के लिए डोमेन नेमिंग सिस्टम को अभिकल्पित किया गया।

वर्ष 1980 में एक हाई-स्पीड नेटवर्क (High Speed Network) NSFNET की स्थापना नेशनल साइंस फाउंडेशन द्वारा की गई। इसमें छह सुपर-कंप्यूटर थे एवं प्रत्येक सुपर कंप्यूटर एक LSI-II नामक मिनी कंप्यूटर से जुड़ा था, जिसे फजबॉल नाम से जाना जाता है।

वह स्थान जहां कोई उपयोगकर्ता तथा संस्था  को अपना परिचय या संबंधित सूचना को प्रकाशित करने की स्वतंत्रता होती है, वेब साइट कहलाता है। वेब साइट के प्रथम पृष्ठ को होम पेज कहते हैं। इसमें वेब साइट के अंदर स्थित सूचनाओं की सूची होती है। प्रोटोकॉल द्वारा इंटरनेट सेवा उपलब्ध करने वाला कंप्यूटर वेब सर्वर कहलाता है तथा इंटरनेट सेवा का उपयोग करने वाला वेब क्लाइंट कहलाता है।

वेब ब्राउजर (Web Browser )

नेट सर्फिंग में प्रयोग होने वाले एप्लीकेशन अथवा प्रोग्राम वेब ब्राउजर कहलाते हैं। यह एक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम है, जिसके प्रयोग द्वारा वेब पेज था वर्ल्ड वाइड वेब को नेविगेट किया जाता है। वेब ब्राउजर को इंटरनेट नेविगेशन टूल एवं वेब क्लाइंट भी कहा जाता है।

”जब उपयोगकर्ता इंटरनेट से जुड़कर इंटरनेट पर स्थित वेब पेजों की दी गई जानकारियों को प्राप्त करने के लिए वेब पेजों को खोलता तथा पढ़ता है, तो इसे सर्फिंग कहते हैं। चूंकि यह सर्फिंग इंटरनेट पर होती है, अतः इसे नेट सर्फिंग कहते हैं। वेब ब्राउजर एचटीएमएल में लिखे गए देव पेजों को इंटरप्रेट, फॉर्मेट तथा डिस्प्ले करता है। वेब पेज के हाइपर टेक्स्ट लिंक के लिए वेब ब्राउजर, वेब सर्वर से संपर्क करता है, ताकि वह लिंक्ड पेज अथवा लिंक्ड डॉक्युमेंट को प्रदर्शित कर सके।

कुछ लोकप्रिय वेब ब्राउजर्स

मोजैक (Mosaic)

मोजैक को मार्क एंडरसीन ने विकसित किया था, जो उस समय नेशनल सेंटर फॉर सुपरकंप्यूटिंग एप्लीकेशन्स नामक संस्था में कार्य करते थे। वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web) के लिए विकसित किया गया पहला ग्रॉफिकल इंटरफेस आधारित तथा ग्राफिक क्षमता वाला वेब ब्राउजर था।

लाइनक्स (Lynx)

इस वेब ब्राउजर को यूनिवर्सिटी ऑफ कंसास (University of Kansas) द्वारा विकसित किया गया था। यह नॉन ग्रॉफिकल अर्थात टेक्स्ट आधारित ब्राउजर है।

नेटस्केप नेविगेटर (Netscape Navigator)

इस वेब ब्राउजर को नेटस्केप कम्युनिकेशन्स कॉर्पोरेशन द्वारा विकसित किया गया था। यह ग्राफिकल इंटरफेस आधारित वेब ब्राउजर है। यह नेटस्केप कम्युनिकेटर का भाग है। नेटस्केप कम्यूनिकेटर इंटरनेट टूल का एक सुइट है। जिसके निम्न भाग हैं-

  • नेटस्केप नेविगेटर
  • नेटस्केप मैसेंजर
  • नेटस्केप कम्पोजर
  • नेटस्केप कॉन्फ्रेंस
  • ओपेरा (Opera)

यह वेब ब्राउजर मोबाइल फोन एवं पीडीए में प्रयोग होता है। ओपेरा वेब ब्राउजर का विकास ओपेरा नार्वे ए. एस. द्वारा किया गया है।

मोजिला फायरफॉक्स (Mozilla Firefox)

यह एक निःशुल्क वेब ब्राउजर है। यह मोजिला कॉर्पोरेशन द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर है। यह विंडोज, लाइनक्स (Linux) आदि प्रचालन तंत्र में प्रयोग होता है।

गूगल क्रोम (Google Chrome)

यह एक वेब ब्राउजर ) है, जिसका विकास वर्ष 2008 में गूगल कंपनी द्वारा किया गया था। यह सुरक्षा प्रावधानों तथा उच्च गति (High Speed) के लिए लोकप्रिय है।

एप्पल सफारी (Apple’s Safari) – यह वर्ष 2007 में एप्पल कंप्यूटर इंकारपोरेशन द्वारा विकसित किया गया वेब ब्राउजर है।.यह आइफोन तथा आइपैड में प्रयोग होता है।

फायरवाल (Firewall)

निजी नेटवर्क या उससे अनाधिकृत पहुंच के रोकने के लिए डिजाइन की गई प्रणाली को फायर (Firewall) कहा जाता है। फायरवाल को हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर दोनों के संयोजन में लागू किया जा सकता है। फायरवाल का उपयोग प्राय: अनधिकृत इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को निजी नेटवर्क तक पहुंचने से रोकने के लिए किया जाता है, इंट्रानेट में प्रवेश करने वाले सभी संदेश फायरवाल से गुजरते है इस स्थिति में फायरवाल प्रत्येक संदेश की जांच करता है, जो निर्दिष्ट सुरक्षा मानदंडों को पूरा नहीं करता उसे वह रोक देता है।

Internet Kiya Hai
Internet Kiya Hai – What is Internet in Hindi

नेटवर्किंग में विभिन्न प्रकार के फायरवाल का उपयोग किया जाता है-

(a) पैकेट फिल्टर – पैकेट फिल्टरिंग उपयोगकर्ताओं के लिए बहुत प्रभावी और पारदर्शी है। यह मुख्यतः उपयोगकर्ताओं द्वारा परिभाषित नियमों के आधार पर कार्य करता है।

(b) एप्लीकेशन गेटवे- एप्लीकेशन गेटवे FTP (File Transfer Protocol) और टेलनेट (Telnet) सर्वर जैसे विशिष्ट अनुप्रयोगों के लिए सुरक्षा तंत्र (Security System) को लागू करता है।

(c) सर्किट लेवल गेटवे —इसकी विशेषता यह है कि यह कनेक्शन स्थापित हो जाने पर सुरक्षा तंत्र लागू करता है।

(d) प्रॉक्सी सर्वर – प्रॉक्सी सर्वर नेटवर्क में प्रवेश करने और छोड़ने के सभी संदेशों को स्वीकार करता है, प्रॉक्सी सर्वर प्रभावी रूप से सही नेटवर्क पते को छिपाता (Hide) है।

इंटरनेट एक्सप्लोरर (Internet Explorer)

यह ग्राफिकल इंटरफेस आधारित है। इसका विकास माइक्रोसॉफ्ट कॉर्पोरेशन द्वारा किया गया है। यह एक्सप्लोरर मैकिनटॉश (Macintosh) और विंडोज प्रचालन तंत्र के सभी संस्करणों पर रन (Run) करता है इंटरनेट एक्सप्लोरर (Internet Explorer) में विभिन्न कार्यों को करें के लिए विभिन्न टूलबार्स प्रदर्शित होते हैं।

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FAQ

Q. इंटरनेट क्या है Internet Kiya Hai ?

Ans. इंटरनेट नेटवर्कों का एक नेटवर्क है। इंटरनेट  विश्व में फैले हुए विभिन्न कंप्यूटर नेटवर्कों के आपस में जुड़ने से बना विश्वव्यापी नेटवर्क है।

Q. इंटरनेट की खोज किसने की?

Ans. प्रो. जे.सी. लिक्लाइडर को इंटरनेट का जनक कहा जाता है।

Q. WWW का फुल फॉर्म क्या है?

Ans. वर्ल्ड वाइड वेब

Q. URL का फुल फॉर्म क्या है?

Ans. यूनीफॉर्म रिसोर्स लोकेटर

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