Shahjahan Biography Hindi – शाहजहाँ का जीवन परिचय



Shahjahan Biography Hindi

शाहजहाँ (Shahjahan) मुग़ल साम्राज्य का पांचवा शासक था, शाहजहां अकबर [Akbar] का पोता और जहांगीर का पुत्र था। शाहजहाँ का जन्म 5 जनवरी 1592 को हुआ था। शाहजहां की माता का नाम जगतगोसाई (जोधबाई, जोधपुर के मोता राजा उदय सिंह की पुत्री) था।

शाहजहां (Shahjahan) ने ताजमहल का निर्माण अपनी बेगम जिसका नाम मुमताज महल था उसके प्रेम का प्रतीक बनवाया। मुगल बादशाह शाहजहाँ (Mughal Emperor Shahjahan) कला और स्थापत्य कला के शौकीन थे।

उसने अपने शासनकाल के समय [ मुगल साम्राज्य ] की कला और संस्कृति को प्रोत्साहित किया, इसलिए शाहजहाँ के युग को वास्तुकला का स्वर्ण युग और भारतीय संस्कृति का सबसे समृद्ध काल भी कहा जाता है।

शाहजहाँ का जीवन परिचय (Shahjahan Biography Hindi)

जन्म/स्थल (Birth/Place)5 जनवरी, 1592 ई. को लाहौर में।
मूल नाम (Original Name)खुर्रम
पूरा नाम (Full Name)शिहाबुद्दीन मुहम्मद शाहजहां
पिता (Father)[ जहांगीर ]
माता (Mother)जगतगोसाई (जोधबाई, जोधपुर के मोता राजा उदय सिंह की पुत्री)
राज्याभिषेक (Coronation)4 फरवरी, 1628 ई.
उपाधिःदक्षिण विजय (अहमदनगर) के बाद शाहजहां की उपाधि प्रदान की गयी।
जीवनसाथी (Partner)अर्जुमंदबानों बेगम (Arjumandbano Begum) के अलावा 8 रानियां
उत्तराधिकारी (Successor)[ औरंगजेब ]
मृत्यु (Death)22 जनवरी 1666 (उम्र 74)
मकबरा (Tomb)आगरा का किला, आगरा, [ मुगल साम्राज्य ]

शाहजहाँ (1627-1658 ई.)

शाहजहाँ (1627-1658 ई.) इसके बचपन का नाम खुर्रम था। इसका विवाह नूरजहाँ के भाई आसफ खाँ की पुत्री अर्जुमंदबानों बेगम से हुआ, जो मुमताज महल के नाम से प्रसिद्ध हुई। शाहजहां का प्रिय राग ध्रुपद था।

जहाँगीर के सबसे छोटे बेटे शहरयार का विवाह नूरजहाँ के पहले पति से उत्पन्न पुत्री से हुआ। नूरजहाँ एवं शाहजहाँ (Shahjahan) समूहों में उस समय प्रतिद्वन्द्विता शुरू हो गयी जब नूरजहाँ व आसफ खाँ ने अपने-अपने दामादों को मुगल सिंहासन पर बैठाने का प्रयास किया। शाहजहाँ ने आसफ खाँ की सहायता से सिंहासन पर अधिकार कर लिया।

शाहजहाँ (Shahjahan) ने दिल्ली के निकट शाहजहाँनाबाद नगर की स्थापना की और आगरा से राजधानी दिल्ली में परिवर्तित की थी। इसे आजकल पुरानी दिल्ली के नाम से जाना जाता है। इसी में उसने सुरक्षा दुर्ग का निर्माण कराया जिस लाल किला या किला-ए-मुबारक के नाम से जाना जाता है।

उसने इसी किले में दीवान-ए-आम व दीवान-ए-खास का निर्माण करवाया। उसने अपना व अपनी बेगम ममताज महल का मकबरा आगरा में बनवाया जो ताजमहल’ के नाम से प्रसिद्ध है। ताजमहल का वास्तुकार उस्ताद ईशा खाँ था। शाहजहा के शासन काल को किसानों का हितैषी व संगमरमर का काल ” कहा जाता है।

इसके निर्माण में प्रयुक्त होने वाला संगमरमर मकराना (राजस्थान) से प्राप्त हुआ था। ताजमहल का निर्माण 1632 ई. से 1653 ई. के बीच हुआ। इसके अलावा शाहजहाँ ने आगरा में मोती मस्जिद तथा दिल्ली में जामा मस्जिद का निर्माण (लाल किले में स्थित मोती मस्जिद का निर्माण) औरंगजेब की ने करवाया था। शाहजहाँ के शासनकाल को द्वितीय स्वर्ण काल कहा जाता है।

शाहजहाँ के शासन व्यवस्था

1336-37 ई. में शाहजहां (Shahjahan) ने सिजदा प्रथा को समाप्त कर उसके स्थान पर चहार-तस्लीम की प्रथा प्रारंभ की थी। पगड़ी में सम्राट के चित्र लगाने की मनाही कर दी गई। इलाही संवत (जो अकबर ने शुरू किया था) के स्थान पर हिजरी संवत लागू किया।

शाहजहां (Shahjahan) के शासन काल के 7वें वर्ष 1634 ई. में शाहजहां ने यह आदेश दिया कि यदि कोई हिंदू इस्लाम धर्म स्वीकार करता है तो उसे अपनी पैतृक सम्पत्ति में हिस्सा मिल जाएगा। इसके अतिरिक्त उसने मुस्लिम लड़की के हिंदू पुरूष से विवाह पर प्रतिबंध लगा दिया।

 हिंदुओं पर तीर्थयात्रा कर पुनः लगा दिया गया। किंतु काशी के कवीन्द्राचार्य की प्रार्थना पर काशी में उसे हटा दिया गया। खम्भात के नागरिकों की प्रार्थना पर उसने गोवध को निषेध कर दिया। उसने अहमदाबाद के चिंतामणि मंदिर का जीर्णोद्वार करवाया था।

शाहजहां ने न्याय के लिए बुधवार का दिन निर्धारित किया था। शाहजहां ने भी दिल्ली के नवस्थापित नगर शाहजहांनाबाद में जामा मस्जिद के के निकट एक नए विद्यालय की स्थापना की थी।

शाहजहां के काल में कवि

शाहजहां (Shahjahan) के काल में सुंदरदास, चिंतामणि तथा कवीन्द्रआचार्य हिंदी के महान विद्वान तथा कवित थे। संस्कृति का एक महान कवि जगन्नाथ था जिसे शाहजहां ने महाकवि राय की उपाधि प्रदान की थी।

इसी के काल में इन हरण ने रामायण का तथा मुंशी बनवारी दास ने प्रबोध चन्द्रोदय का फारसी में अनुवाद गुलजोर हाल नाम से किया।

अब्दुर रशीद ने बीजगणित का संस्कृत से फारसी अनुवाद किया। शाहजहां के काल का महानतम ज्योतिषविद मुल्लाफरीद था जिसने जिज-ए-शाहजहानी नामक खगोलीय चार्ट तैयार किया।

शाहजहां निर्माण कार्य

दिल्ली के निकट शाहजहानाबाद नामक नगर बसाया। इसके अतिरिक्त उसने लाल किला (दिल्ली), दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, ताजमहल (आगरा) और दिल्ली में जामा मस्जिद का निर्माण ,(आगरा) के लाल किले में स्थित मोती मस्जिद का निर्माण करवाया था। दिल्‍ली की जामा मस्‍जिद के अलावा आगरा की जामा मस्‍जिद भी शाहजहां ने बनवाई थी। यह मस्‍जिद शाहजहाँ की पुत्री, शाहजा़दी जहाँआरा बेगम़ को समर्पित है। जहांगीर का मकबरा जैसे भव्य भवनों का निर्माण करवाया।

शाहजहाँ की पत्नी (List of Shahjahan Wife)

  1. कंधारी बेगम Qandahari Begum
  2. मनभावती बाईजी लाल साहिबा Manbhavati Baiji Lal Sahiba
  3. अर्जुमंद बानो बेगम उर्फ ​​मुमताज महल
  4. इज़्ज़ उन निसा बेगम
  5. फतेहपुरी महल Fatehpuri Mahal
  6. कुदिसा बेगम Qudisa Begum
  7. राजकुमारी लीलावती बाजी लाल साहिबा, सरहिनिदी बेगम, मुटी बेगम साहिबा

कंधारी बेगम Qandahari Begum शाहजहाँ की पहली पत्नी थीं। उन्होंने 12 दिसंबर 1609 को शाहजहाँ से शादी की थी। उनका जन्म अफगानिस्तान के कंधार में हुआ था, इसलिए उनका नाम उस उपाधि के नाम पर रखा गया। उनकी मृत्यु 7 फरवरी 1677 को हुई थी। उन्हें 1628 में उनके द्वारा बनाए गए आगरा के कंधारी बाग में दफनाया गया था। मुमताज़ महल की मृत्यु के बाद वह शाहजहाँ के बहुत करीब थीं।

जोधपुर की राजकुमारी मनभावती बाईजी लाल साहिबा Manbhavati Baiji Lal Sahiba शाहजहाँ की दूसरी पत्नी थीं। वह जोधा बाई (शाहजहाँ की माँ) और सम्राट जहाँगीर की भतीजी थी। वह मारवाड़ के मोटा राजा उदय सिंह की पोती थीं कई मुगल बादशाहों ने आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर तक जोधपुर की एक राजकुमारी से शादी की।

अर्जुमंद बानो बेगम उर्फ ​​मुमताज महल शाहजहाँ उर्फ ​​प्रिंस खुर्रम की तीसरी पत्नी थीं। मुमताज महल ने 30 अप्रैल 1612 को आगरा में शाहजहाँ से शादी की। 17 जून 1631 को उनकी मृत्यु हो गई और उन्होंने शाहजहाँ के 14 बच्चों को जन्म दिया। वह 1628 से 1631 तक मुगल साम्राज्य की मुख्य पत्नी और महारानी थीं। उनकी बेटी गौहर बानो बेगम को जन्म देते समय उनकी मृत्यु हो गई और उसकी याद में ताजमहल बनवाया था।

अकबराबादी महल जिसे इज़्ज़ उन निसा बेगम के नाम से भी जाना जाता है, शाहजहाँ की चौथी पत्नी थी। शादी 2 सितंबर 1617 को हुई थी। मार्च 1621 में उनकी मृत्यु हो गई।

शाहजहाँ की मृत्यु (Shahjahan Death)

शाहजहाँ के पुत्र दारा शिकोह, शुजा, औरंगजेब व मुराद थे। दारा शिकोह एक विद्वानव्यक्ति था। उसने उपनिषदों का फारसी में अनुवाद किया। शाहजहाँ के बीमार होने पर उसके पुत्रों में उत्तराधिकार प्राप्त करने के लिए युद्ध शुरू हो गए थे।

दाराशिकोह शाहजहां (Shahjahan) का सबसे बड़ा पुत्र था उसे पंजाब की सूबेदारी मिली थी। तथा उसे शाहजहां ने अपना उत्तराधिकारी घोषित कर शाहबुलंद इकबाल की उपाधि दी थी। औरंगजेब ने दाराशिकोह को मरवा दिया।

1658 ई. में औरंगजेब ने विजय प्राप्त करते हुए राजधानी पर अधिकार कर लिया तथा शाहजहाँ को गिरफ्तार कर आगरा किले में कैद कर दिया। यहीं पर 1666 ई. में शाहजहाँ की मृत्यु हो गयी।

FAQ Sections

1. शाहजहां की पहली पत्नी कौन थी?

जवाब: कंधारी बेगम Qandahari Begum शाहजहाँ की पहली पत्नी थीं। उन्होंने 12 दिसंबर 1609 को शाहजहाँ से शादी की थी।

2. शाहजहां ने इलाही संवत के स्थान पर क्या लागु किया था?

जवाब: इलाही संवत (जो अकबर ने शुरू किया था) के स्थान पर हिजरी संवत लागू किया।

3. ताजमहल का निर्माण किसने और कब करवाया था?

जवाब: शाहजहाँ ने अपनी तीसरी पत्नी मुमताज महल की याद में 1632 ई. से 1653 ई. के बीचनिर्माण करवाया था।

4. शाहजहां का अन्य दूसरा नाम क्या था?

जवाब: खुर्रम

5. शाहजहां की माता का क्या नाम था ?

जवाब: जगतगोसाई (जोधबाई, जोधपुर के मोता राजा उदय सिंह की पुत्री)।