आउटपुट डिवाइस क्या है?



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आउटपुट डिवाइस क्या है? Output Device in Hindi

आउटपुट डिवाइस (Output Device in hindi) कंप्यूटर हार्डवेयर का एक मुख्य भाग होता है। यह एक वैद्युत यांत्रिकी युक्ति है। जब कंप्यूटर मॉनीटर पर हमें यह कोई सूचना देता है, तो उसे निर्गत कहते हैं और जिसके माध्यम से हमें ये सूचना प्राप्त होती है, उसे आउटपुट डिवाइस कहते हैं।

Output Device in Hindi
Output Device in Hindi

आउटपुट डिवाइस (Output Devicea) दो प्रकार की होती हैं-

  • (i) हार्ड कॉपी युक्तियां (Hard Copy Devices)
  • (ii) सॉफ्ट कॉपी युक्तियां (Soft Copy Devices)

(i) हार्ड कॉपी युक्तियां (Hard Copy Devices)—ये वे युक्तियां (De- vices) हैं, जिनसे हम पृष्ठ (Page) पर निर्गत (Output) प्राप्त कर सकते हैं, जैसे- प्रिंटर (Printer), प्लॉटर (Plotter)

(ii) सॉफ्ट कॉपी युक्तियां (Soft Copy Devices)- ये वे युक्तियां (Devices) हैं, जिनसे हम कंप्यूटर प्रणाली पर अस्थायी रूप से निर्गत प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन सॉफ्ट कॉपी को स्पर्श नहीं कर सकते है, केवल उसे देख सकते हैं, जैसे- मॉनीटर, एल.सी.डी.

आउटपुट डिवाइस के 10 उदाहरण

  • मॉनीटर (Monitor)
  • प्रिंटर (Printer)
  • प्लॉटर (Plotter)
  • प्रोजेक्टर (Projector)
  • स्पीकर (Speaker)
  • ईअर फोन (Ear Phone) 
  • हेड फोन (Head Phone)

मॉनीटर (Monitor)

मॉनीटर एक प्रकार की आउटपुट डिवाइस (Output Devices) है, इसे विजुअल डिस्प्ले यूनिट (Visual Display Unit) भी कहते हैं। मॉनीटर निर्गत को अपनी स्क्रीन पर सॉफ्ट कॉपी के रूप में प्रदर्शित करता है। यह टेलीविजन स्क्रीन की तरह निर्गत  उत्पन्न करता है। मॉनीटर (Monitor) पर प्रदर्शित चित्र हजारों छोटे-छोटे रंगीन डॉट्स से मिलकर बने होते हैं, जिन्हें पिक्सल कहते हैं। मॉनीटर तीन प्रकार के होते हैं-

(i) सी.आर.टी. 

(ii) एल.सी.डी. (L.C.D.) 

(iii) एल.ई.डी. (L.E.D.)

(i) सी. आर. टी. (C.R.T.) का पूरा नाम कैथोड रे ट्यूब (Cathode Ray Tube) है। यह एक प्रकार की आउटपुट डिवाइस (Output Devices) है। C.R.T. एक निर्वात (Vacuum) ट्यूब होता है। इसके अंदर एक या एक से अधिक इलेक्ट्रॉन गन और फॉस्फोरेसेंट स्क्रीन होती है, जो चित्र को प्रदर्शित करती है। C.R.T. मॉनीटर में लाखों छोटे-छोटे लाल, हरे, और नीले फॉस्फोरस बिंदु होते हैं, जो इलेक्ट्रॉन पुंज द्वारा स्पर्श होने से चमकते (हैं। इसका उपयोग मुख्यतः कंप्यूटर के मॉनीटर, टी.वी. तथा राडार को टारगेट करने में किया जाता है।

(ii) एल. सी. डी. (L.C.D.) का पूरा नाम लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले (Liquid Crystal Display) है। यह एक प्रकार की निर्गत युक्ति है। यह एक डिजिटल टेक्नोलॉजी है, जो एक समतल सतह पर तरल क्रिस्टल के माध्यम से आकृति बनाता है एवं पिक्सल को स्क्रीन पर प्रदर्शित करता है। एल. सी. डी. (L.C.D) मॉनीटर में विद्युत की खपत कम होती है।

इसका उपयोग टीवी, लैपटॉप, मोबाइल में पिक्सल (Pixels) के स्थान पर होता है। प्रत्येक स्क्रीन में पिक्सल आव्यूह के रूप में होता है, जो स्क्रीन पर चित्र (Image) प्रदर्शित करता है। सर्वप्रथम L.C.D. में पैसिव मैट्रिक्स तकनीक का प्रयोग होता था, परंतु वर्तमान में L.C.D. में एक्टिव मैट्रिक्स तकनीक का उपयोग हो रहा है। एक्टिव मैट्रिक्स तकनीक में TET (Thin Film Transistor) का उपयोग होता है, जो पैसिव मैट्रिक्स तकनीक की अपेक्षा ज्यादा उपयोगी है।

(iii) एल.ई.डी. (L.E.D.) का पूरा नाम प्रकाश उत्सर्जक डायोड (Light Emitting Diode) है। यह एक प्रकार की निर्गत युक्ति (Output Device) के साथ-साथ अर्द्धचालक युक्ति (Semiconductor Device) भी है, जो प्रकाश उत्सर्जित (Light Emitting) करता है।

इसका उपयोग नियान इंडिकेटर लैंप के स्थान पर भी होता है। इसका उत्पादन सर्वप्रथम वर्ष 1962 में था। ये सेमी अर्द्धचालक (कंडक्टर) प्रकाशीय स्रोत हैं। एल.ई.डी. का निर्माण आवर्त सारिणी के तृतीय और पंचम समूह (Group) के तत्वों द्वारा किया जाता है। एल.ई.डी. को बनाने में मुख्यतः निम्न अर्द्धचालक (Semiconductor) पदार्थों का उपयोग किया जाता है-

INGAN (Indium Gallium Nitride ) का उपयोग नीले, हरे तथा पराबैंगनी (Ultra Violet) रंगों के लिए किया जाता है। पीले, लाल तथा नारंगी रंग के एल.ई.डी. के लिए एल्डमिनियम, गैलियम, इन्डीयम, फॉस्फाइड का उपयोग होता है।

प्रिंटर (Printer)

प्रिंटर या मुद्रण यंत्रों से तात्पर्य एक ऐसी प्रणाली से होता है, जिसमें कंप्यूटर द्वारा प्राप्त परिणामों को कागज पर छाप कर स्थायी रूप से उपयोगकर्ता को प्रस्तुत किया जाता है। मुद्रण यंत्र कंप्यूटर से परिणामों को विद्युत तरंगों के रूप में प्राप्त करता है एवं उन्हें कूट संकेत के अनुसार अक्षरों में परिवर्तित करके कागज पर छाप देता है। यह छापने की क्रिया मुद्रण यंत्र के प्रकार एवं उसमें उपयोग की जाने वाली तकनीक के अनुसार संपन्न होती है।

इस आधार पर मुद्रण यंत्र को दो प्रकार से विभाजित किया जा सकता है-

1- समघात प्रिंटर (Impact Printer)

2- असमघात प्रिंटर (Non-Impact Printer) समघात प्रिंटर (Impact Printer)

इस प्रकार के प्रिंटर में किसी अक्षर या आकृति को कागज पर छापने के लिए एक स्याहीयुक्त फीते पर हथौड़े या पिनों की सहायता से पीछे से प्रहार किया जाता है, जिससे कागज पर वांछित आकृति उभर आती है। समघात मुद्रण यंत्र की श्रेणियां निम्न हैं-

(i) डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर (ii) डेजी-व्हील प्रिंटर (iii) ड्रम प्रिंटर

(i) डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर – इसके प्रिंट हेड में सामान्यतः 9 से 24 पिनें होती हैं।

इन पिनों के रिबन तथा कागज पर स्पर्श से डॉट छपते हैं। जितने अधिक पिन एक प्रिंटर के प्रिंट हेड में होते हैं, वह उतना ही अच्छा माना जाता है। इन प्रिंटरों में हम रिबन को परिवर्तित कर किसी भी रंग की रंगीन छपाई कर सकते हैं। इस मुद्रण की विशेषता यह है कि यह अक्षरों के बीच अंतर को कम करता है।

इसकी छपाई गति सामान्यतः 30 से 600 अक्षर प्रति सेकंड होती है।

(ii) डेजी-व्हील प्रिंटर (Daisy Wheel Printer)—यह एक प्रकार का समघात प्रिंटर है। डेजी-व्हील धीमी गति का मुद्रण यंत्र है, परंतु इसके निर्गत की स्पष्टता उच्च होती है। इसका अधिकतम उपयोग पत्र आदि छापने में होता है।

(iii) ड्रम प्रिंटर (Drum Printer) – ड्रम मुद्रक लाइन मुद्रण यंत्र होता है, जो एक बार में पूरी लाइन की छपाई करता है। इसमें तेज गति से घूमने वाला एक ड्रम होता है जिसकी सतह पर अक्षर उभरे हुए होते हैं। ड्रम मुद्रण यंत्र एक घूर्णन में एक लाइन छापता है। ड्रम मुद्रण यंत्र समघात मुद्रण यंत्र होते. हैं, क्योंकि यह कागज पर हैमर द्वारा स्याही वाले रिबन से अक्षर को उभारते हैं।

Drum Printer

असमघात प्रिंटर (Non-Impact Printer)

ये मुद्रण यंत्र छपाई करते समय आवाज नहीं करते हैं, क्योंकि छपाई के दौरान इनके छपाई हेड कागज को स्पर्श नहीं करते। इनकी छपाई गति एवं स्पष्टता समघात मुद्रण यंत्र से अधिक होती है। समघात मुद्रण यंत्र की श्रेणियां निम्न हैं-

  • इंकजेट प्रिंटर
  • लेजर प्रिंटर

(i) इंकजेट प्रिंटर- यह एक प्रकार का असमघात मुद्रण यंत्र है। इस मुद्रण यंत्र में एक नोजल के माध्यम से कागज पर स्याही की बूंदों की बौछार करके अक्षर व चित्रों की छपाई की जाती है। इस मुद्रण यंत्र के प्रिंटआउट अधिक स्पष्ट होते हैं, क्योंकि इसमें प्रत्येक अक्षर कई डॉट्स से मिलकर बनते हैं। रंगीन इंकजेट प्रिंटर में स्याही के चार – नीला, लाल, पीला, काला नोजल ये चारों रंग मिलकर किसी भी रंग को उत्पन्न करते है इसलिए इनका उपयोग सभी प्रकार के रंगीन मुद्रण यंत्री किया जाता है।

(ii) लेजर प्रिंटर (Laser Printer) – इस प्रकार के प्रिंटर उच्च गुणवत्ता वाले टेक्स्ट और ग्रॉफिक को प्रिंट किया जा सक वह प्रक्रिया जिसके द्वारा हम उच्च गुणवत्ता के टेक्स्ट प्रक्रिया कहते हैं। कार्यालय में प्रयोग होने वाले लेजर प्रिंटर प्राप्त करते हैं, उसे वैद्युत स्थैतिक विकास वर्ष 1981 में हुआ तथा जिसे Xerox 8010 नाम दिया इसमें ‘टोनर इंक’ को माध्यम के प्रयुक्त करते हुए कागज पर आकृतियां बनाने हेतु लेजर किरणों का प्रयोग होता था।

छपाई गति छपाई गुणवत्ता दोनों ही दृष्टियों से लेजर मु यंत्र डॉट मैट्रिक्स तथा इंक जेट मुद्रण यंत्र से अच्छा माना जाता है। आजकल लेजर मुद्रण यंत्र बाजार में सबसे ज्यादा लोकप्रिय मुद्रण यंत्र है, क्योंकि इ छपाई गति व छपाई गुणवत्ता अच्छी होती है।

प्लॉटर (Plotter)

प्लॉटर वह आउटपुट डिवाइस है, जिससे सहायता से कागज पर विभिन्न प्रकार के उच्चको के Graphic, जैसे चार्ट, लेखाचित्र, तालिका , सारिणी, नवसे और के कंप्यूटर अभिकल्पन आदि प्राप्त किए जा सक इनका प्रयोग प्रायः तभी किया जाता है, जब मुद्रण यंत्र & इस प्रकार के ग्राफिक प्राप्त करना मुश्किल जाए। कार्यप्रणाली और संरचना की दृष्टि प्लॉटर मुद्रण यंत्र से इस बात में भिन्न है कि प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है।

इस कार्य के लिए प्रकाश को दीवार पर भेजा जाता है, जिसे प्रक्षेप करना कहते हैं तथा इस युक्ति को प्रक्षेपक कहते हैं। प्रक्षेपक का निर्गत वास्तविक आकार से बड़ा, समतल और अधिक रंगीन होता है। प्रक्षेपक का अधिकतम उपयोग शिक्षण कक्ष, सार्वजनिक कार्यक्रम, व्यावसायिक सभा और सिनेमा घर आदि में किया जाता है।

स्पीकर (Speaker)

स्पीकर एक प्रकार का निर्गत एवं हार्डवेयर युक्ति है, यह कंप्यूटर से जुड़ने (Connect) के पश्चात ध्वनि उत्पन्न करने का कार्य करता है। ध्वनि उत्पन्न (Generate) करने के लिए कंप्यूटर में साउंड कार्ड (Sound Card) का उपयोग किया जाता है।

हेड फोन (Head Phone)

त्रित हेड फोन एक प्रकार की आउटपुट डिवाइस (Output Device in Hindi) एवं हार्डवेयर युक्ति (Device) है। इसका उपयोग ध्वनि निर्गत करने के लिए किया जाता है। इसे ईयर फोन या ईयर स्पीकर कहते हैं। हेड फोन को केवल एक सिग्नल, जैसे ऑडियो, एम्प्लीफायर, रेडियो, सी.डी. प्लेयर, मोबाइल, वीडियो आदि से जोड़ा जा सकता है।

प्रोजेक्टर (Projector)

प्रोजेक्टर  एक प्रकार की आउटपुट डिवाइस (Output Device in Hindi) है. इसका उपयोग कंप्यूटर छवि, वीडियो और टेक्स्ट को दीवार या समतल स्थान पर प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है। इस कार्य के लिए प्रकाश को दीवार पर भेजा जाता है, जिसे प्रक्षेप करना कहते हैं तथा इस युक्ति को प्रक्षेपक कहते हैं। प्रक्षेपक का निर्गत वास्तविक आकार से बड़ा, समतल और अधिक रंगीन होता है। प्रक्षेपक का अधिकतम उपयोग शिक्षण कक्ष , सार्वजनिक कार्यक्रम, व्यावसायिक सभा और सिनेमा घर आदि में किया जाता है।

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