Mauryan Empire in Hindi : मौर्य वंश इतिहास से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी



मगध साम्राज्य के उदय ने अनन्तः मौर्य वंश Mauryan Empire in Hindi की स्थापना का मार्ग प्रशस्त कर दिया। मौर्य साम्राज्य ने एक विशाल साम्राज्य की स्थापना कर राजनीतिक एकता स्थापित की थी। इस वंश के प्रमुख शासक में चन्द्रगुप्त, बिन्दुसार, अशोक  थे।

मौर्य वंश इतिहास Mauryan Empire in Hindi के बारे में पूर्ण जानकारी। मौर्य वंश ने भारत पर 323 ई० पू० से 187 ई० पू० यानी लगभग 136 सालों तक शासन किया। इस वंश की स्थापना चन्द्रगुप्त मौर्य ने की थी। मौर्य वंश का प्रशासन कैसा रहा होगा जाने इसके बारे में।

Mauryan Empire in Hindi
Mauryan Empire in Hindi
शासककार्यकाल
चन्द्रगुप्त मौर्य323-298  ई॰पु॰
बिन्दुसार 323-298  ई॰पु॰
अशोक273-232  ई॰पु॰
कुणाल232-224  ई॰पु॰
दशरथ मौर्य224-216  ई॰पु॰
सम्प्रति216-207 ई॰पु॰
शालिशुक207-206  ई॰पु॰
देवबर्मन206-199  ई॰पु॰
शतधन्नवा199-191  ई॰पु॰
वृहद्रथ191-187  ई॰पु॰

चन्द्रगुप्त मौर्य (323-298 ईपू॰)  

चन्द्रगुप्त मौर्य : Mauryan Empire Hindi

चन्द्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य की सहायता से अंतिम नंद वंश के शासक घननाद को पराजित कर 25 बर्ष की उम्र में मौर्य वंश (Mauryan Empire in Hindi) की स्थापना की थी।चंद्रगुप्त मौर्य ने तत्कालीन शासक ग्रीक राजा, सिकंदर के एक सेनापति सेल्यूकस निकेटर पराजित किया था। सेल्यूकस ने अपने राजदूत मेगस्थनीज को चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजा था। चन्द्रगुप्त मौर्य के साम्राज्य का विस्तार उत्तर पश्चिम में हिन्दूकुश से लेकर दक्षिण में उत्तरी कर्नाटक तक तथा पूरब में मगध से लेकर पश्चिम में सौराष्ट्र तक था।

सेल्यूकस निकेटर और चन्द्रगुप्त मौर्य की संधि

इस संधि के फलस्वरूप सेल्यूकस ने अपनी पुत्री हेलेना का विवाह चन्द्रगुप्त मौर्य से कर दिया। चन्द्रगुप्त मौर्य ने सेल्यूकस को 500 हाथी उपहार में दिए । सेल्यूकस ने चन्द्रगुप्त मौर्य को दहेज में 4 राज्य 1. अर्कोजिया (कंधार) 2. आरिया (हेरात) 3. परोपनिशे (काबुल) 4. जेड्रोसिया (बलूचिस्तान)प्रदान किये।

चाणक्य कौन थे?

Chanakya
आचार्य चाणक्य

चाणक्य चन्द्रगुप्त मौर्य के प्रधानमंत्री थे। चाणक्य के अन्य नाम कौटिल्य या विष्णुगुप्त भी था। उनके पिता का नाम श्री चणक था चाणक्य का नाम अपने पिता के नाम पर पड़ा। मौर्य साम्राज्य (Mauryan Empire in Hindi) की स्थापना करने में चाणक्य जी का बहुत बड़ा योगदान है।

चाणक्य के द्वारा अर्थशास्त्र, राजनीति शास्त्र, अर्थनीति, कृषि, समाजनीति आदि महान ग्रंन्थ रचित है। जिसके चलते अर्थशास्त्र को मौर्यकालीन भारतीय समाज का दर्पण माना जाता है।

बिन्दुसार (323-298 ई॰पु॰)

बिन्दुसार चन्द्रगुप्त मौर्य का पुत्र था। यूनानियों ने इसे अमित्रचेट्स या अमित्रघात कहा है। जिसका अर्थ शत्रुओं का नाश करने वाला है। परिशिष्टपर्वन में बिन्दुसार की माता का नाम दुर्धरा (जैन परम्परा के अनुसार) मिलता है।

उपाधियां: यूनानी लेखों के अनुसार ‘अमित्रकेटे या अमित्रोकेट्स’ (अमित्रोचेट्स) अथवा अमित्रोकेडीज।

संस्कृत रूपः अमित्रघात या अमित्रखात (शत्रुओं का नाश करने वाला) यूनानी लेखक एथनीक्स ने बिंदुसार को अमित्रोकेट्स कहा है। स्ट्रैबो ने अलिट्रोकेडस कहा है। वायु पुराण में भद्रासार कहा गया है। जैन ग्रंथ: सिंह सेन (सिंहासन) कहते हैं।

यूनानी लेख एथनेसियस: बिंदुसार के मैत्रीपूर्ण पत्र-व्यवहार में सीरिया के शासक एंटियोकस से 3 वस्तुओं (1. मीठी मदिरा, 2. सूखी अंजीर, 3. एक सोफिस्ट (दार्शनिक) की मांग की थी। दार्शनिक को छोड़कर अन्य वस्तुओं को एन्टियोकस ने बिंदुसार के पास भेजा। बिन्दुसार ने सुदूरवर्ती दक्षिण भारतीय क्षेत्रों को भी जीत कर मगध साम्राज्य में सम्मिलित कर लिया था।

सीरिया शासक एन्टीयोकस प्रथम ने डायमेक्स नामक व्यक्ति को बिन्दुसार के राजदरबार में राजदूत के रूप में नियुक्त किया। मिस्र शासक फिलाडेल्फस-टॉलमी दितीय ने डियानीसियस नामक मिस्र, राजदूत को बिन्दुसार के राजदरबार में नियुक्त किया।

दिव्यावदान में उल्लेख आजीवक सम्प्रदाय के पिंगल वत्स (ज्योतिष) से बिन्दुसार के अच्छ संबंध का प्रमाण मिलता है। बिन्दुसार की मृत्यु 273 ई. पू. के लगभग हुई थी।

अशोक (273-232 ई.पू.) 

King Ashoka : अशोक
अशोक: King Ashoka

अशोक, बिन्दुसार का पुत्र था। माँ: सुभद्रांगी (दिव्यावदान के अनुसार) पत्नी: देवी (विदिशा के श्रेष्ठी की पुत्री) सिंहली परम्परा के अनुसार यह अशोक की प्रथम पत्नी थी। इसी से महेन्द्र व संघमित्रा जन्मे थे। दिव्यावदान में अशोक की एक अन्य पत्नी तिरक्षिता का उल्लेख है।

शिलालेख (इलाहाबाद अभिलेख या रानी का अभिलेख, जिसमें समुद्रगप्त की प्रयाग प्रशस्ति तथा मुगल सम्राट जहांगीर का लेख भी उत्कीर्ण) है।

रानी का अभिलेख में अशोक की एकमात्र रानी कारूवाकि का ही उल्लेख है।असन्धिमित्रा अशोक की पटरानी थी। राज्यारोहण के पूर्व अशोक उज्जैन (अवन्ति) व तक्षशिला का प्रांतीय शासक था।

उपाधिः

बौद्ध ग्रंथ के अनुसार बौद्ध होने के पूर्व उसे (अशोक) चण्ड अशोक कहते हैं। शासनादेशों को शिलाओं पर खुदवाने वाला प्रथम भारतीय शासक अशोक था।

शिलालेखः शिलाओं तथा चट्टानों पर उत्कीर्ण राज्यादेशों को कहा जाता हैं स्तंभों पर उत्कीर्ण शासनादेश स्तंभ लेख कहलाते हैं।

अशोक का नाम मात्र लघु शिलालेख प्रथम की प्रतिकृतियों में मिला है। अशोक ने 273 ई. पू. में ही सिंहासन प्राप्त कर लिया था, लेकिन 4 वर्ष तक गृहयुद्ध में रहने के कारण अशोक का वास्तविक राज्याभिषेक 269 ई. पू. में हुआ।

अपने राज्याभिषेक के 8वें वर्ष (261 ई. पू.) में अशोक ने कलिंग पर आक्रमण किया और उसे जीत लिया।

कलिंग युद्ध में हुए व्यापक नरसंहार ने अशोक को विचलित कर दिया | जिसके परिणामस्वरूप उसने शस्त्र त्याग की घोषणा कर दी। इसके बाद उसने बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया जबकि इससे पहले वह ब्राह्मण मतानुयायी था।

सम्राट अशोक प्रथम शासक था जिसने अभिलेखों के माध्यम से प्रजा को संबोधित किया। सर्वप्रथम 1837 ई. मेंजेम्स प्रिंसेप ने अशोक के अभिलेखों को ब्राह्मी लिपि में पढ़ने में सफलता प्राप्त की थी। अशोक की पहचान प्रियदर्शी के रूप में हुई।

कलिंग का युद्ध – राज्याभिषेक के बाद अशोक ने अपने पिता एवं पितामह की दिग्विजय की नीति को जारी रखा। इस समय कलिंग का राज्य मगध साम्राज्य की प्रभुसत्ता का चुनौती दे रहा था।

कलिंग को महापदमनन्द ने जीतकर मगध साम्राज्य में मिला दिया था। बिन्दुसार के शासन काल में किसी समय कलिंग ने अपनी स्वतंत्रता घोषित कर दिया था।

कलिंग का प्राचीन राज्य वर्तमान दक्षिणी उडीसा में स्थित था। कलिंग युद्ध तथा उसके परिणामों के विषय में अशोक के 13वें अभिलेखों से विस्तृत सूचना प्राप्त होती है।

13वें शिलालेख में इस युद्ध के भयानक परिणामों का इस प्रकार उल्लेख हुआ है। इसमें 1 लाख 50 हजार व्यक्ति बंदी बनाकर निर्वासित कर दिये गये, 1 लाख लोगों की हत्या की गयी तथा इससे भी कई गुना अधिक मर गये।

मौर्य वंश का प्रशासन कैसा रहा होगा जाने इसके बारे में>>>

अशोक के उत्तराधिकारी : Mauryan Empire in Hindi

कुणाल (232-224 ई.पू.)

अशोक की मृत्यु के पश्चात उसके पुत्रों (तीवर, महेंद्र, कुणाल तथा जालोक) में से कुणाल गद्दी पर बैठा। पुराण, जैन तथा बौद्धग्रंथ इसकी पुष्टि करते हैं।

कुणाल ‘धर्मविवर्धन’ (दिव्यावदान) तथा सयशस (विष्णु व भागवतपुराण) के नाम से भी विख्यात था।

कुणाल के संबंध में एक कहानी प्रचलित है कि उसकी विमाता तिष्यरक्षिता ने धोखे से कुणाल को अंधा करवा दिया था।

अतः, कुणाल स्वयं राजकाल चलाने में असमर्थ था। वह नाममात्र का शासक था। वास्तविक प्रशासन कुणाल का पुत्र संप्रति ही संभालता था।

इसीलिए बौद्ध व जैनग्रंथों में संप्रति को ही अशोक का उत्तराधिकारी माना गया है। कुणाल 8 वर्षों तक ही राज्य कर सका। 224 ई.पू. में उसकी मृत्यु हो गई।

दशरथ (224-216 ई.पू.)

दशरथ वायुपुराण के अनुसार कुणाल के बाद उसका पुत्र बंधुपालित राजा बना, लेकिन मत्स्यपुराण के अनुसार दशरथ राजा बना।

संभवतः, ये सभी कुणाल के ही पुत्र थे। दशरथ के ही विभिन्न नाम थे (संप्रति को छोड़कर)। दशरथ का अभिलेख नागार्जुनी पहाड़ी (बराबर की पहाड़ी, गया, बिहार) से प्राप्त हुआ है।

अपने पितामह अशोक की तरह दशरथ ने भी देवानांप्रिय की उपाधि धारण की तथा आजीविकों के लिए गुफाएं दान की थी। दशरथ के समय में भी संप्रति शासन और राज्य में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करता रहा।

संभवतः, साम्राज्य का विभाजन 2 भागों में हो गया। राज्य का पूर्वी भाग दशरथ के अधिकार में रहा तथा पश्चिमी भाग संप्रति के हाथों में चला गया।

पाटलिपुत्र और उज्जयिनी अब साम्राज्य की 2 राजधानियां बन गई। दशरथ ने 8 वर्षों तक (216 ई.पू. तक) शासन किया।

संपदि (संप्रति) (216-207 ई.पू.)

संप्रति अशोक के उत्तराधिकारियों में संप्रति ही सबसे योगय शासक सिद्ध हुआ। 216 – ई.पू. में दशरथ के बाद वह राजा बना, परंतु इसके पूर्व भी वह अशोक, कुणाल और दशरथ के शासनकाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका था। संप्रति जैन-मतावलंबी था।

उसने जैनधर्म के विकास के लिए अनेक प्रयास किए, अनेक जैनमंदिरों एवं विहारों का उसने निर्माण करवाया।

जैनग्रंथों से ज्ञात होता है कि उसके राज्य की 2 राजधानियां (1. पाटलिपुत्र, 2. उज्जयिनी) थी।  संप्रति किसी प्रकार साम्राज्य के विघटन को रोक रखने में सफल हुआ।

चन्द्रगुप्त की ही तरह भीषण दुर्भिक्ष से दु:खी होकर उसने भी राज्य त्याग दिया और दक्षिण भारत (श्रवणबेलगोला, मैसूर) जाकर जैन मुनियों की तरह धिमरण द्वारा अपना जीवन त्याग दिया। 207 ई.पू. में संप्रति की मृत्यु हुई।

शालिशक (शालिशूक) – (207-206 ई.पू.) 

संप्रति के बाद 207 ई.पू. में शालिशूक राजा बना। उसका दूसरा नाम न संभवतः, बृहस्पति था। वह संप्रति का पुत्र था।

संभवतः संप्रति के पश्चात् उसके पुत्रों में राजगद्दी के लिए संघर्ष हुआ। इस संघर्ष में शालिशूक विजयी हुआं उसने 3 अपने बड़े भाई की हत्या कर गद्दी शासन प्राप्त किया।

शालिशूक ने धर्म के नाम पर आडम्बर कर जनता को सताया था। गार्गीसंहिता में इस राजा को दुष्टात्मा कहा गया है।

फलस्वरूप, उसके विरूद्ध प्रतिक्रिया तेज होती गई। इस अव्यवस्था का लाभ उठा कर राजकुमार वृषसेन (संप्रति के पुत्र) ने साम्राज्य के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्वतंत्र राज्य की स्थापना कर लिया।

कश्मीर के शासक जालौक ने भी मगध पर आक्रमण किया। इसी समय उत्तर-पश्चिमी सीमा पर यवनों ने एण्टियोकस के नेतृत्व में हमला कर दिया।।

गार्गीसंहिता के अनुसार यवनों ने मथुरा, पांचाल व साकेत पर अधिकार कर लिया तथा पाटलिपुत्र पर आक्रमण किया; और कि यवन शासक एण्टियोकस गांधार के शासक सुभागसेन से संधि कर वापस लौट गया।

इससे समूचे साम्राज्य में अर्थव्यवस्था और अशांति व्याप्त हो गई।इसी वातावरण में शालिशुक की हत्या कर दी गई।

देववर्मा, बृहद्रथ (206-187 ई.पू.)

शालिशूक के पश्चात् देववर्मा (देववर्मन, सोमशर्मन्) राजा बना। उसने 206 से 199 ई.पू. तक राज्य किया।

मौर्यवंश का अंतिम शासक बृहद्रथ (191-187 ई.पू.) था।

शिलालेख

अशोक के शिलालेखों के 2 वर्ग (1. बृहत् शिलालेख व 2. लघु शिलालेख) है।

शिलालेख विषय-वस्तु
पहला
  • पशु-हत्या व उत्सव-समारोहों पर प्रतिबंध
  • प्रसिद्ध उद्धरण: यहां कोई जीव मारकर बलिदान न किया जाये।
दूसरा
  • इसमें समाज कल्याण संबंधी कुछ कार्य बताये गये हैं
  • जो धम्म – के कार्यों में निहित हैं। इसमें 2 प्रकार (1. मनुष्यों के लिए, 2. पशुओं के लिए) की चिकित्सा परिचर्चा का उल्लेख है।
तीसरा
  • इसमें ब्राह्मणों-श्रमणों के प्रति उदारता को एक विशेष गुण तथा माता-पिता की सेवा करना, अल्प व्यय करना एवं अल्प संचय करना को अच्छा कार्य बताया गया है।
  • प्रसिद्ध उद्धरण- मेरे साम्राज्य में सभी जगह युक्त राजुकों व प्रादेशिकों के साथ प्रति 5वें वर्ष दौरान अनुसंधान करे जिससे वह प्रजा को धर्म की और अन्य कार्यों की शिक्षा दे सके।
चौथा
  • इसमें धम्म नीति से संबंधित महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किये गये हैं।
  • इसमें कहा गया है कि धम्म नीति के द्वारा अनैतिकता तथा ब्राह्मण-श्रमणों के प्रति निरादर की प्रवृत्ति, हिंसा, मित्रों-संबंधियों के साथ अशोभनीय व्यवहार एवं इसी प्रकार के अन्य गलत प्रवृत्तियों पर रोक लग सकती है।
  • पशु हत्या भी बहुत हद तक रोकी जा सकती है।
पांचवां
  • इसमें प्रथम बार अशोक के शासन के 14वें वर्ष में धम्ममहामात्यों (धर्ममहामात्रों) की नियुक्ति एवं उनके कर्तव्यों की चर्चा की गई हैं।
छठा
  • इसमें धम्महामात्यों के लिए आदेश हैं।
  • शिलालेख के दूसरे भाग में सजग, सक्रिय प्रशासन व सुचारू व्यापार का उल्लेख है।
  • धर्मलिपियों को खुदवाने का उद्देश्य बनाये गये हैं।
सातवां
  • इसमें सभी संप्रदायों के बीच सहिष्णुता का आह्वान है।
आठवा
  • इसमें कहा गया है कि सम्राट अब विहार-यात्रा को त्याग धम्म-यात्रा करेंगे तथा विभिनन वर्गों से संपर्क करेंगे।
नवा
  • इसमें जन्म, बीमारी, विवाह के उपरांत तथा यात्रा के पूर्व होने वाले समारोहों की निंदा की गई है।
  • पत्नियों व माताओं द्वारा समारोह मनाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
दसवां
  • इसमें ख्याति व गौरव की निंदा तथा धम्म नीति की श्रेष्ठता पर विचार प्रकट किया गया है।
ग्यारहवा
  • इसमें धम्म नीति की व्याख्या की गई है। इसमें बड़ों का आदर, पशु-हत्या न करने तथा मित्रों के प्रति उदारता पर बल दिया गया है।
बारहवा
  • इसमें सभी संप्रदायों के बीच सहिष्णुता का निवेदन किया गया है।
तेरहवां
  • इसमें कलिंग की लड़ाई और वहां के विनाश का वर्णन है। यहां अशोक के युद्ध विरोधी विचार हैं।
  • इसमें युद्ध की त्रासदी का विस्तृत वर्णन किया गया है और इससे संकेत मिलता है कि वह युद्ध का विरोधी क्यों हो गया।
  • इसमें अशोक के समीपवर्ती राज्यों की सूची मिलती है- योन, कंबोज, गांधार, रठिक/राष्ट्रिक, भोजक, पितनिक, आंध्र, नाभक, नाभपक्ति, परिमिदस आदि।
  • इसमें अशोक के समयसमसामयिक 5 यूनानी राजाओ का उल्लेख है। 1. एण्टियोकस-II (सीरिया), 2. फिलाडेलफ्स आलेमी-II (मिस्र), 3. एण्टिगोनस (मकदूनिया), 4. मागस (सीरिन), 5. अलेक्जेंडर (एपिरस)।
  • प्रसिद्ध उद्धरण: राज्याभिषेक के 8 वर्ष बाद 9वें वर्ष में देवानांपिय पियदस्सि (प्रियदर्शी) राजा ने कलिंग पर विजय प्राप्त की।
चौदहवां
  • इसमें लोगों को धार्मिक जीवन व्यतीत करने के लिए बारंबार प्रेरणा दी गई है।

FAQ Section

चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजा गया राजदूत कौन था?

Ans. मेगस्थनीज

यूनानियों को भारत से बाहर किसने निकाला था?

Ans. चन्द्रगुप्त मौर्य

अर्थशास्त्र की रचना किसने की थी?

Ans. विष्णुगुप्त

अशोक की वह पत्नी कौन थी जिसने अशोक को प्रभावित किया ?

Ans. कारुवाकी 

कलिंग का युद्ध किस वर्ष हुआ था?

Ans. 261 ई. पू.

जूनागढ़ शिलालेख का सम्बन्ध किससे है?

Ans. रुद्रदामन 

चरक किसके दरबार में प्रसिद्ध चिकित्सक थे?

Ans. कनिष्क

चन्द्रगुप्त मौर्य के तत्कालीन यूनानी शासक कौन था?

Ans. सेल्यूकस निकेटर

मौर्यवंश का अंतिम शासक कौन था?

Ans. बृहद्रथ

भारत का मैकियावेली किसे कहा जाता था?

Ans. कौटिल्य 

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