Jahangir History in Hindi – जहाँगीर (1605 -1627 ई.) का इतिहास



जहाँगीर (1605 -1627 ई.) Jahangir History in Hindi – इसके बचपन का नाम सलीम था। [ अकबर (Akbar) ] की मृत्यु के पश्चात अनेक इतिहासकार 3 नवंबर, 1605 को आगरा के दुर्ग में इनका राज्याभिषेक हुआ मानते हैं। परंतु वाकियात-ए-जहांगीरी में राज्यारोहण की तिथि 12 अक्टूबर,1605 ई. दी गयी है। उसने नुरूद्दीन मुहम्मद जहांगीर बादशाहगाजी की उपाधि धारण की थी।

Jahangir History in Hindi
जहाँगीर 1605-1627 ई.-Jahangir History in Hindi

जहाँगीर (1605 -1627 ई.) Jahangir History in Hindi

[ Mughal Emperor – मुगल शासक ] जहाँगीर के सिंहासन पर बैठते ही जहाँगीर के पुत्र खुसरों ने विद्रोह कर दिया जिसे जहाँगीर ने पकड़वाकर अन्धा करवा दिया। जहाँगीर ने सिक्खों के 5वें गुरू, गुरू अर्जुन देव को, शहजादे खुसरों की सहायता करने के कारण फाँसी करवा दी थी। जहांगीर ने अपनी पुस्तक तुजुक-ए-जहांगीरी-Tuzuk-e-Jahangiri (फारसी भाषा) में 12 अध्यादेशों का उल्लेख मिलता है जिन्हें आइने-ए-जहांगीरी – Ain-e-Jahangiri कहा जाता है।

जहाँगीर की जीवनी – Jahangir Biography in hindi

जन्म/स्थल (Birth/Place)30 अगस्त, 1569 ई. में फतेहपुर सिकरी, मुग़ल एम्पायर।
बचपन का नामसलीम
पूरा नाम (Full Name)नुरूद्दीन मुहम्मद जहांगीर
पिता (Father)अकबर
माता (Mother)मरियम उज्जमानी (हरखाबाई उर्फ जोधाबाई)
जीवनसाथी (Partner)नूरजहाँ ( Nur Jahan) के अलावा 8 रानियां
संतान (Children)[शाहजहाँ (Shahjahan)]
खुसरो मिर्ज़ा (Khusro- Mirza)
परवेज़ मिर्ज़ा (Parvez Mirza )
शहरयार मिर्ज़ा (Shahryar Mirza)
सुल्तान‑उन बेगम (Sultan Un Begum)
राज्याभिषेक (Coronation)24 अक्टूबर, 1605 ई. में।
नामकरण (Naming)फतेहपुर सीकरी के प्रसिद्ध सूफी संत शेख सलीम चिश्ती के आशिर्वाद से सलीम उत्पन्न हुआ। अकबर प्यार से उसे शेख बाबू कहा करता था।
जहांगीर के दरबार में आने वाला प्रथम अंग्रेज राजदूतसर्वप्रथम 1608 ई. में कैप्टन विलियम हांकिन्स इंग्लैंड के राजा जेम्स प्रथम के दूत के रूप में सम्राट अकबर के नाम पत्र लेकर बादशाह जहांगीर के दरबार में उपस्थित हुआ। हॉकिन्स तुर्की एवं फारसी भाषा का जानकार था।
मृत्यु (Death)28 अक्टूबर, 1627 ई. को भिम्बर नामक स्थान पर उसकी मृत्यु हो गयी।
मकबरा (Tomb)उसके शव को लाहौर में रावी नदी के तट पर शहादरा नामक स्थल पर दफनाया गया।

जहांगीर के महत्वपूर्ण तथ्य

  • जहाँगीर (Jahangir) का विवाह 1611 ई. में शेर-ए-अफगान की विधवा मेहरून्निसां से हुआ जो बाद में नूरजहाँ के नाम से प्रसिद्ध हुई।
  • जहांगीर ने 1612 ई. में अपने राज्याभिषेक के 7वे वर्ष में प्रथम बार रक्षा बंधन का त्यौहार मनाया तथा अपनी कलाई पर राखी बंधवायी। जहांगीर इसको निगाह-ए-दश्त कहता था।
  • जहांगीर अनारकली से प्रेम करता था। 1615 ई. में लाहौर में एक सुन्दर कब्र बनवायी थी। उस पर लिखवाया कि “यदि मैं अपनी प्रेयसी का चेहरा एक बार पुनः देख पाता, तो कयामत के दिन तक अल्लाह को धन्यवाद देता”।
  • अपने राज्याभिषेक के 11वें वर्ष 1616 ई. में उसने शिवरात्रि के दिन योगियों से भेंट की थी।
  • जहाँगीर ने शाहजादे खुर्रम को महाराणा प्रताप के पुत्र अमर सिंह के विरूद्ध सैन्य अभियान की जिम्मेदारी सौंपी, जिसमें सफलता प्राप्त करके अमर सिंह को सन्धि के लिए बाध्य कर दिया।
  • जहांगीर (Jahangir) ने दो-अस्पा व सिंह-अस्पा प्रथा आरंभ की थी। इसके अंतर्गत बिना जात पद बढ़ाए ही मनसबदारों को अधिक सेना रखनी पड़ती थी।
  • दोअस्पाः इसके अंतर्गत मनसबदारो को अपने सवार पद के दोगुने घोड़े रखने पड़ते थे।
  • सिंह-अस्पाः इसके अंतर्गत मनसबदारों को अपने सवार पद के तीन गुने घोड़ रखने पड़ते थे।
  • श्रीकांत नामक हिंदू को हिंदुओं का जज नियुक्त किया था। जहांगीर ने पुर्तगाली फादर जेवियर से ईसाई धर्म की शिक्षा ग्रहण की थी।

जहाँगीर की न्याय घंटी

जहाँगीर [ Jahangir History in Hindi ] अपनी न्याय की जंजीर के लिए जाना जाता था। उसने आदेश दे रखा था कि घंटियों वाली एक सोने की जंजीर उसके आगरा किले के शाहबुर्ग व यमुना नदी के तट पर स्थित पत्थर के खम्भे में लगवाया था। 230 गज लम्बी सोने की जंजीर में 60 घंटियां लटकी हुई थी। कोई भी व्यक्ति, जिसके साथ राज्य के अधिकारियों ने अन्याय किया हो, उस जंजीर को खींच कर बादशाह से फरियाद (न्याय) की मांग कर सकता था।

नूरजहां कौन थी?

Noor Jahan
नूरजहां – Noorjahan

मूल नामः मेहरून्निसा

उपाधिः नूरमहल (प्रसाद ज्योति) व नूरजहां (जगज्योति)

पिताः गियास बेग

माता: असमत बेगम

पूर्वजः तेहरान निवासी

विवरणः प्रारंभ में गियास बेग शाह तहमास्प सफावी के अधीन वजीर के रूप में नियुक्त था। 1577 ई. में शाह के मृत्यु के पश्चात गियास बेग की आर्थिक स्थिति दयनीय हो गयी। अतः वह जीविका की तलाश में भारत आया। पहले वह कंधार पहुंचा जहां एक धनी व्यापारी मलिक मसूद के काफिले में शामिल हो गया। कंधार में मेहरून्निसा का जन्म हुआ और वह मलिक मसूद के साथ कंधार से फतेहपुर सीकरी आया और मलिक मसूद की सहयता से अकबर के दरबार में उपस्थित हुआ और उसको साधारण पद पर नियुक्त किया।

वह मिर्जा के नाम से प्रसिद्ध हो गया। 1595 ई. मे उसे काबुल का दीवान नियुक्त किया गया तत्पश्चात शाही कारखाने में दीवान-ए-बयूतात-Diwan-e-Bayut के पद पर प्रतिष्ठित किया गया। अकबर के बाद जब जहांगीर शासक बना तो मिर्जा गियास बेग को एतमादउद्दौला की पदवीं से सम्मानित कर संयुक्त दीवान नियुक्त किया।

मेहरून्निसा की 17 वर्ष की आयु में विवाह 1594 ई. में अब्दुर्रहीम खान-ए-खाना-Abdurrahim Khan-e-Khana के अधीनस्थ एक फारसी युवक अली कुली खां से हुआ। विवाह के पश्चात वह शाही सेवा में शामिल हुआ।

अकबर ने अली कुली खां को शाहजादा सलीम-Saleem के अंतर्गत मेवाड़ अभियान के लिए नियुक्त किया। अली कुली द्वारा हाथ से एक शेर मारने के उपलक्ष्य में सलीम ने उसकी वीरता से प्रसन्न होकर उसे शेर अफगान की उपाधि प्रदान की थी।

जहांगीर (Jahangir) ने शेर अफगान की विधवा मेहरून्निसा व उसकी पुत्री लाडली बेगम को राजधानी बुला लिया। मेहरून्निसा को राजमाता रूकैय्या सुलतान की सेवा में नियुक्त कर दिया गया। 1611 ई. में नौरोज के अवसर पर जहांगीर ने मेहरून्निसा को देखा और उस पर आसक्त हो गया। उसे नूरमहल व नूरजहां (Noormahal and Noorjahan) की उपाधि प्रदान की तथा मई 1611 ई. में उसे से विवाह कर लिया।

गुलाब से इत्र बनाने की विधि का आविष्कार नूरजहां की मां अस्मत बेगम ने किया था। उसी ने इस विधि को अपनी पुत्री नूरजहां को बताया था।

नूरजहां गुट अपने विवाह के कुछ ही वर्षों पश्चात नूजरजहां ने अपना दल बना लिया था जिसे नूरजहां गुट या जुंतागुट (Junta Group) जनता गुट के नाम से पुकारा गया। इस गुट में नूरजहां उसके पिता एतमादउद्दौला, माता असमत बेगम, उसका भाई आसफ खां व शाहजादा खुर्रम शामिल थे। इस दल का प्रभुत्व 1622 ई. तक स्थापित रहा।

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जहांगीर के दरबार में आने वाला अंग्रेज राजदूत

सर्वप्रथम 1608 ई. में कैप्टन विलियम हांकिन्स – Captain William Hankins इंग्लैंड के राजा जेम्स के दूत के रूप में सम्राट अकबर के नाम पत्र लेकर बादशाह जहांगीर के दरबार में उपस्थित हुआ। हॉकिन्स तुर्की एवं फारसी भाषा का जानकार था।

उसने हॉकिन्स को 400 मनसब तथा फिरंगी खां (इंगलिश खा) की उपाधि से सम्मानित किया। वह 3 वर्ष तक मुगल दरबार में रहा किंतु पुर्तगालियों के षड्यंत्र के कारण जहांगीर से विशेषाधिकार पाने में असफल रहा।

हॉकिन्स के पश्चात जेम्स प्रथम का दूसरा दूत पॉलकेनिंग को 1612 ई. में उसका पत्र लेकर मुगल दरबार में उपस्थित हुआ। किंतु उसे भी सफलता नहीं मिली।

1615 ई. में तीसरे अंग्रेज दूत के रूप में विलियम एडवर्ड जेम्स प्रथम का पत्र लेकर बादशाह की सेवा में उपस्थित हुआ। यद्यपि वह कुछ सुविधा पाने में सफल रहा किंतु यह अस्थायी सिद्ध हुआ।

टॉमस रो जेम्स प्रथम का पत्र लेकर 1615 ई. में पादरी एडवर्ड टेरी केसाथ मुगल शासक जहांगीर के दरबार में उपस्थित हुआ। अपनी व्यापारिक सुविधाओं को प्राप्त करने के उद्देश्य से उसने नूरजहां, आसफ खां व खुर्रम को बहुमूल्य उपहार दे कर अपने पक्ष में कर लिया। बादशाह जहांगीर ने एक फरमान (आदेश) जारी कर अग्रेजों को कुछ व्यापारिक सुविधाएं प्रदान की। तथा पुर्तगालियों के आक्रमण के विरूद्ध उनकी सहायता का भी आश्वासन दिया। इस प्रकार टॉमस रो सूरत में अंग्रेजों को व्यापार करने के लिए फरमान प्राप्त करने में सफल रहा।

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जहाँगीर की जीवनी से संबंधित प्रश्न (Jahangir History in Hindi)

1जहांगीर की माता का नाम क्या था ?

जवाब: मरियम उज्जमानी (हरखाबाई उर्फ जोधाबाई)

2. जहांगीर के दरबार में आने वाला प्रथम अंग्रेज राजदूत कौन था?

जवाब: सर्वप्रथम 1608 ई. में कैप्टन विलियम हांकिन्स – Captain William Hankins इंग्लैंड के राजा जेम्स के दूत के रूप में सम्राट अकबर के नाम पत्र लेकर बादशाह जहांगीर के दरबार में उपस्थित हुआ। हॉकिन्स तुर्की एवं फारसी भाषा का जानकार था।

3. मुगल शासकों की दरबारी भाषा क्या थी

जवाब: फारसी भाषा

4. मेहरून्निसा को जहांगीर ने कौन सी उपाधि दी थी ?

जवाब: नूरमहल (प्रसाद ज्योति) व नूरजहां (जगज्योति)

5. जहाँगीर का मकबरा कहाँ स्थित है ?

जवाब: उसके शव को लाहौर में रावी नदी के तट पर शहादरा नामक स्थल पर दफनाया गया।