Indian History in Hindi: इतिहास का परिचय



Indian History in Hindi: भारतीय इतिहास की शुरुआत लगभग 65000 साल पहले होमो सेपियन्स से हुई थी। होमो सेपियन्स अफ्रीका, दक्षिण भारत, बलूचिस्तान होते हुए सिंधु घाटी पहुंचे और यहां शहरीकरण को बसाया, जिससे सिंधु घाटी सभ्यता का विकास हुआ। भारतीय इतिहास, सिंधु घाटी की रहस्यमय संस्कृति से शुरू होकर, भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में किसान समुदाय तक फैल गया। भारतीय इतिहास में पाषाण युग, कांस्य युग, लौह युग का विस्तृत वर्णन मिलता है। आज के हमारे इस ब्लॉग में हम भारतीय इतिहास के बारे में हिंदी में विस्तार से जानेंगे।

इतिहास (Indian History in Hindi) को 3 वर्गों में विभक्त किया जा सकता है।

1. प्राक् इतिहास/ प्रागैतिहासिक काल (Pre-History Period) -लिखित इतिहास के पहले कालखण्ड को प्रागैतिहासिक काल कहा गया है। इस कालखण्ड के लोगों को लिपि या अक्षर का ज्ञान नहीं था। यह आदिम लोगों का इतिहास पत्थर व हड्डियों के औजारों तथा उनकी गुफा चित्रकारी के आधार पर लिखा गया है। पाषाणकाल को इसके अंतर्गत रखा गया है।

2. आद्य ऐतिहासिक काल (Proto-History Period) -उस काल खण्ड का इतिहास जो ऐतिहासिक काल से पहले का है, जब लिपि व अक्षर का उन्हें ज्ञान था लेकिन आज भी उसे नहीं पढ़ा जा सका है, आद्य ऐतिहासिक काल के अंतर्गत आता है। इतिहास लेखन की दृष्टि से सिन्धु घाटी की सभ्यता व वैदिक काल को इसी काल खण्ड के अंतर्गत रखा गया है।

3. ऐतिहासिक काल (Historical Period) -इतिहास का वह काल जिससे संबंधित लिखित सामग्री प्राप्त होती है एवं उसे पढ़ा जा सका है। भारत में यह काल 6वीं शताब्दी ई.पू. से प्रारम्भ होता है। महाजनपद काल से अब तक का कालखंड शामिल हैं।

पुराणों में 4 युग

पुराणों में 4 युग (1. कृत/सत् युग, 2. त्रेतायुग, 3. द्वापरयुग, 4. कलियुग) बतायें गये हैं। इनमें हर युग अपने पिछले युग से घटिया बताया गया है और कहा गया है कि एक युग के बाद जब दूसरा युग आरंभ होता है तब नैतिक मूल्यों और सामाजिक मानदंडों का अधःपतन होता है। इतिहास में काल, स्थान व विशेष महत्व को स्पष्ट किया गया है।

कल्प (ब्रह्मा का दिन) – मनवंतर (71 दिव्य युग)- दिव्य युग (4 युग)

सतयुग

4×432000 वर्ष

त्रेतायुग

3×432000 वर्ष

द्वापरयुग

2×432000 वर्ष

कलियुग

1×432000 वर्ष

भारतीय पुरातत्व के जनक कौन थे?

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ब्रिटिश पुरातत्वशास्त्री विलियम जोन्स द्वारा 15 जनवरी, 1784 को स्थापित एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल (कोलकाता) का उत्तराधिकारी थे। 1788 में इनका पत्र द एशियाटिक रिसर्चेज प्रकाशित होना आरंभ हुआ था और 1814 में यह प्रथम संग्रहालय बंगाल में बना। ASI अपने वर्तमान रूप में 1861 में ब्रिटिश शासन के अधीन सर अलेक्जेंडर कनिंघम द्वारा तत्कालीन वाइसरॉय चार्ल्स जॉन कैनिंग की सहायता से स्थापित हुआ था।

पुरातत्व के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए  कनिंघम को भारतीय पुरातत्व का जनक सर अलेक्जेंडर कनिंघम [ Father of Indian Archaeology) कहा जाता है। 1944 में, जब मॉर्टिमर व्हीलर महानिदेशक बने, तब इस विभाग का मुख्यालय, रेलवे बोर्ड भवन शिमला में स्थित था। यह  भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।

history in hindi
इतिहास का परिचय

इतिहास का परिचय

(History in Hindi)

प्रागैतिहासिक/पाषाण काल

पुरा पाषाण काल: (अज्ञात काल से 8000 ई.पू.)

मध्य पाषाण काल: (8000 ई.पू. से 4000 ई. पू.)

नव पाषाण काल:  (4000 ई.पू. से 2500 ई.पू.)

आद्य ऐतिहासिक काल

सिंधु घाटी सभ्यता:  (2500 ई.पू. से 1500 ई.पू.)

वैदिक सभ्यता: (1500 ई.पू. से 600 ई.पू.)

वैदिक सभ्यता +

ऋग्वैदिक काल: (1500 ई.पू. से 1000 ई.पू.)

उत्तर वैदिक काल: (1000 ई.पू. से 600 ई.पू.)

ऐतिहासिक काल

प्राचीन भारत का इतिहास: (600 ई.पू. से 712 ई.)

मध्यकालीन भारत का इतिहास: (712 ई. से 1707 ई.)

आधुनिक भारत का इतिहास: (1707 ई. से 15 अगस्त, 1947 ई.)

प्राचीन भारत का इतिहास +

महाजनपद काल : (6वीं शताब्दी ई.पू.)

मगधसाम्राज्य: (600 ई.पू. से 300 ई.पू.)

मौर्य साम्राज्य: 323 ई.पू. से 184 ई.पू.

मौर्योत्तर काल: (184ई.पू. से 313 ई.)

गुप्त साम्राज्य: (319 ई. से 550 ई.)

हर्षवर्धन काल: (606 ई. से 647 ई.)

रामायण के अन्य नाम – चतुर्विंशति साहस्री संहिता/ रामचरितमानस

महाभारत के अन्य नाम – सतसाहस्री संहिता/ जय संहिता

प्रमुख महानिदेशक

1. सर अलेक्जेंडर कनिंघम (1871-1885)

2. जेम्स बर्गस (1886-1889)

3. जॉन मार्शल (1902-1928)

4. हैरोल्ड हग्रव्स (1928-1931)

5. राय बहादुर दया राम साहनी (1931-1935) (प्रथम भारतीय महानिदेशक)

6. जे.एफ. ब्लॅकिस्टन (1935-1937)

7. राय बहादुर के.एन. दीक्षित (1937-1944)

8. सर मॉर्टिमर व्हीलर (1944-1948)

9. एन.पी. चक्रवर्ती (1948-1950)

10. माधव स्वरूप वत्स (1950-1953)

11. ए. घोष (1953-1968) 12. बी.बी. लाल (1968-1972) 13. देशपांडे (1972-1978) 14. बी.के. थामर (1978-1985)

इतिहास के जन्मदाता कौन थे?

हेरोडोटस (Herodotus), यूनान का प्रथम इतिहासकार व भूगोलवेत्ता था। हेरोडोटस का संस्कृत नाम हरिदत्त था। हेरोडोटस हिस्ट्री (History) शब्द के प्रथम प्रयोगकर्ता थे। इन्होंने वास्तविक इतिहास लेखन की नींव रखी थी। रोमन दार्शनिक सिसरो ने हेरोडोटस को इतिहास का जनक/पिता (Father of (History) की संज्ञा दी थी। इन्होने अपने इतिहास का विषय पेलोपोनेसियन युद्ध को बनाया था। इनकी प्रसिद्ध पुस्तक हिस्टोरिका (Historica) थी।

इतिहास की तिथियाँ

अंग्रेजी में B.C. (ई.पू.) का तात्पर्य ‘बिफोर क्राइस्ट’ (ईसा पूर्व) से है। कभी-कभी तिथियों से पहले A.D. (ई.) लिखा जाता हैं। यह ‘ एनो डॉमिनी’ नामक दो लैटिन शब्दों से बना है तथा इसका तात्पर्य ईसा मसीह के जन्म के वर्ष से है।

आजकल A.D. की जगह C.E. तथा B.C. के स्थान पर B.C.E. का प्रयोग होता है। C.E. अक्षरों का प्रयोग ‘कॉमन एरा’ तथा B.C.E. का ‘बिफोर कॉमन एरा’ के लिए होता है। इन शब्दों का प्रयोग इसलिए करते हैं क्योंकि विश्व के अधिकांश देशों में अब ‘कॉमन एरा’ का प्रयोग सामान्य हो गया है। कभी-कभी अंग्रेजी के B.P. अक्षरों का प्रयोग होता है, जिसका तात्पर्य ‘बिफोर प्रेजेंट है। वर्तमान से पहले शब्दों का प्रयोग किया है

समय शब्दावली

1. दशक (Decade): 10 वर्ष की अवधि ।

2. सिल्वर जुबली (Silver Jubillee): 25 वर्ष की अवधि ।

3. रूबी जुबली (Ruby Jubillee): 40 वर्ष की अवधि । 

4. पूर्वार्द्ध (First Half): सदी का प्रथम 50 वर्ष (1-50 वर्ष तक)। 

5. गोल्डन जुबली (Golden Jubillee): 50 वर्ष की अवधि। 

6. डायमंड जुबली (Diamond Jubillee): 60 वर्ष की अवधि। 

7. प्लेटिनम जुबली (Platinum Jubillee): 75 वर्ष की अवधि ।

8. उत्तरार्द्ध (Second Half): सदी का द्वितीय 50 वर्ष (51-100 वर्ष तक)।

9. सदी / शताब्दी (Century): 100 वर्ष की अवधि ।

10. सहस्राब्दी (Millenium): 1000 वर्ष की अवधि ।

11. ग्रेट जुबली (Great Jubillee): 2000 वर्ष की अवधि ।

वर्तमान कैलेंडर

वर्तमान में ग्रेगोरियन कैलेण्डर एक अन्तर्राष्ट्रीय कैलेण्डर है। इसे समूचे विश्व के देशों में मान्यता दी गई है और विश्व के अधिकांश हिस्सों में इसी कैलेण्डर का प्रयोग किया जाता है।

इटली के डाक्टर अलॉयसियस लिलिस (Aloysius Lilius) द्वारा प्रस्तावित इस कैलेण्डर की घोषण 24 फरवरी, 1582 को पोप ग्रेगरी-XIII ने की थी। इन्हीं के नाम पर इस कैलेण्डर के नाम के साथ ग्रेगरी शब्द जुड़ा। प्राचीन जूलियन कैलेण्डर की अशुद्धियां सुधारने के लिए इसे प्रचलन में लाया गया।

1. ईस्वी संवत् का विक्रम संवत् में परिवर्तनः ईस्वी संवत में 57 जोड़कर प्राप्त किया जा सकता है।

ईस्वी संवत् + 57 = विक्रम संवत्

2. शक संवत् का ईस्वी संवत् में परिवर्तनः शक संवत् में 78 जोड़कर प्राप्त किया जा सकता है। (2015-57 =शक संवत 1937)

शक संवत् + 78 ईस्वी संवत्

प्रमुख संवत्

कलिसंवत (3102 B.C.): महाभारत युद्ध व राजा परीक्षित के जन्म के समय से आरंभ।

सप्तर्षि संवत् (3076 B.C.): इसे लौकिक संवत् भी कहा जाता है। कलिसंवत के 25 वर्ष बाद कश्मीर में प्रचलित था।

बुद्ध संवत् (544 B.C.): श्रीलंका की गणना अनुसार बुद्ध संवत् 544B.C. में प्रारंभ हुआ। महात्मा बुद्ध के निर्वाण की वास्तविक तिथि 486B. C. थी।

महावीर संवत् (527 B.C.): महावीर स्वामी द्वारा आरम्भ, इस संवत् का प्रयोग जैन-सभा से संबोधित गणनाओं में हुआ है।

विक्रम संवत् (58 B.C.): राजा विक्रमादित्य द्वारा उज्जैयिनी में शकों पर विजय प्राप्त करने के उपरांत चलाया था।

ईसामसीह का जन्म

ईसामसीह का जन्म प्रथम शताब्दी माना गया जिसमें पहले का काल B. C. और बाद का A.D. कहलाया।

शक संवत् (78 A.D.): कुषाण राजा कनिष्क द्वारा शुरू किया गया जिसे भारत सरकार द्वारा 22 मार्च 1957 को अधिकारिक कलैण्डर घोषित किया गया। इसे शालिवाहन संवत् भी कहते हैं। यह भारत का राष्ट्रीय संवत् है।

कल्चुरी संवत् (248 A.D.): आभारी राजा बाद में चेदि के कल्चुरियों द्वारा प्रयुक्त होने पर यह कल्चुरी संवत् कहलाया।

गुप्त संवत् (319 A.D.): गुप्तवंशीय शासक चन्द्रगुप्त प्रथम द्वारा प्रारम्भ। हर्ष संवत् (606 A.D.): कन्नौज के शासक हर्षवर्धन द्वारा राज्यारोहण के समय प्रारंभ किया गया।

हिजरी संवत् (622 A.D.): 622 ई.से हिजरी संवत का आरम्भ हुआ। यह तिथि हजरत मुहम्मद साबह का मक्का त्याग कर मदीना जाने की स्मृति में है। मदीना जाने को हिजरत कहा जाता है।

कोल्लम संवत् (825 A.D.): कल्याणी के चालुक्य शासक विक्रमादित्य-4 द्वारा मालाबार केरल क्षेत्र में प्रारंभ था। इसे चालुक्य विक्रमसंवत् कहा जाता है।

इलाही संवत् (1583 A.D.): मुगल सम्राट अकबर द्वारा प्रारम्भ राजशक (1673): मराठा शासक छत्रपति शिवाजी द्वारा राज्यारोहण के उपलक्ष्य में प्रारंभ।

भारत का नामकरण

इण्डिया शब्द इण्डस से निकला है, जिसे संस्कृत में सिन्धु कहा जाता है। भारतवर्ष नाम सर्वप्रथम पाणिनी की अष्टाध्यायी में आया है। भारत देश का यह । नामकरण ऋग्वैदिक काल के प्रमुख जन भरत के नाम पर किया गया। वैदिक काल में उत्तरी भारत को आर्यावर्त कहा जाता था। और दक्षिण भारत को दक्षिणापथ कहा जाता था। जैन कथाओं के अनुसार देश का यह नाम प्रथम जैन तीर्थकर ऋषभदेव के बड़े पुत्र का नाम भारत था जो प्रतापी व शक्तिशाली राजा थे।

पौराणिक कथाओं के अनुसार पौरूव वंश के राजा दुष्यन्त एवं शकुन्तला के पुत्र भरत के नाम पर दिया गया था। ब्राह्मण ग्रंथों में इस देश को भारतवर्ष कहा गया है। विष्णुपुराण में समुद्र के उत्तर और हिमालय के दक्षिण में जो देश स्थित हैं। । उसका नाम भारत है क्योंकि यहां भारती संतति (भारत की प्रजाति) निवास करती । है। भागवत पुराण में इस देश को अजनाभवर्ष की संज्ञा दी गयी थी।

भारत को जम्बूद्वीप का एक भाग भी माना जाता है। बौद्ध ग्रन्थों में जम्बूद्वीप उस भू-भाग को कहा गया है, जहां ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में मौर्य वंश का शासन था।

यूनानियों ने भारतवर्ष के लिए इण्डिया शब्द का प्रयोग किया जबकि मध्यकालीन लेखकों ने इस देश को हिन्द अथवा हिन्दुस्तान नाम से सम्बोधित किया। यह शब्द भी फारसी शब्द हिंदू से बना है।

यूनानी भाषा के इंदे के आधार पर अंग्रेज इसे इंडिया कहने लगे देश का र्वतमान नाम भारत भी प्राचीन काल से प्रचलित रहा है। इसका अर्थ भरतों का देश है। भरत एक प्राचीन कबीले का नाम था।

भारतवर्ष का सर्वप्रथम उल्लेख हाथी गुम्फा अभिलेख में मिलता है। हिंदुस्तान शब्द उल्लेख सर्वप्रथम 262 ई. के सासानी अभिलेख में मिलता है।

भारत के संविधान अनुच्छेद-1 में (भारत अर्थात् इंडिया राज्यों का संघ होगा – India, that is Bharat shell be a union of state) स्पष्ट किया गया है।

म्यूजियम की शुरूआत

म्यूजियम शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के माउसियन शब्द से हुई है, जिसका अर्थ एकांत में अध्ययन करने का मंदिर है। विश्व का प्रथम म्यूजियम अलेक्जेंड्रिया में ईसा में 3 शताब्दी पहले बनाया गया था। इसमें शोधकर्ताओं को | ज्ञान प्रदान करने वाली विश्व की अनेक वस्तुओं का संग्रह किया गया था। इसके बाद ऐसे म्यूजियम की स्थापना हुई जिसमें विविध यंत्र, जानवरों की खालें, हाथ, दांत, आदि रखे जाते थे।

19वीं शताब्दी में राजा महाराजाओं ने म्यूजियम की स्थापना में विशेष सहयोग दिया। फ्रांस की राज्य क्रांति के बाद म्यूजियम सामान्य व्यक्तियों के लिए खोल दिए गए। 1830 में जर्मनी के बर्लिन शहर में फाल्टेस म्यूजियम का निर्माण किया गया। आधुनिक ढंग का सबसे पुराना संग्रहालय ऑक्सफोर्ड में है जो 1679 में बना था। 1874 में स्थापित अमेरिकन म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री को सबसे बड़ा म्यूजियम होने का दर्जा प्राप्त है। म्यूजियमों में अनेक दुर्लभ वस्तुएं संग्रहीत होता। है, इसलिए उन्हें विशेष सुरक्षा प्रदान की जाती है।

म्यूजियम-डे की शुरूआत

म्यूजियम के प्रति लोगों में जागरूकता लाने, संरक्षित करने में लोगों के योगदान देने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने इंटरनेशनल म्यूजियम-डे मनाने की शुरूआत की थी। प्रथम बार म्यूजियम – डे 1983 में मनाया गया। प्रति वर्ष 18 मई को वर्ल्ड म्यूजियम-डे मनाया जाता है।

भारत में म्यूजियम का इतिहास

भारत में म्यूजियम का इतिहास काफी पुराना है। भारत का प्रथम म्यूजियम 1814 में कलकत्ता में स्थापित किया गया था।

एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल द्वारा स्थापित यह म्यूजियम एशिया का सबसे पुराना और सबसे बड़ा म्यूजियम है। इस म्यूजियम को उद्देश्य से स्थापित किया जिससे यहां की कलात्मक वस्तुओं को संग्रह कर देश से बाहर ले जाया जा सके।

इस म्यूजियम में संग्रहीत कई दुर्लभ व कलात्मक वस्तुओं को अंग्रेज शासकों द्वारा इंग्लैंड भेज दिया गया।

भारत का आदि महाकाव्यः रामायण

रचयिता: महर्षि वाल्मिकी

रचना काल: 400 B. C.

विकास क्रमः 6000 श्लोक 12000 श्लोकशत साहस्री 24000 चतुर्विंशति साहस्री संहिता।

विशेष: रामायण का तमिल भाषा में प्रथम बार अनुवाद चोल शासक । कुलोत्तुंग तृतीय के समय के कवि कम्बन ने किया। इसे रामायणम् या रामावतारम् नाम से जाना जाता है। रामायण का बंगलाभाषा में अनुवाद सर्वप्रथम कृत्तिवास ने बारवक् शाह के समय किया।

20वीं शताब्दी में ई.वी. रामस्वामी नायकर उर्फ पेरियार द्वारा तमिल भाषा में ‘सच्ची रामायण’ की रचना की गई थी। ज्ञातव्य हो कि रामायण की रचना महाभारत के बाद हुयी थी।

रामायण के 7 कांड, 500 सर्ग व 2400 श्लोक

1. बालकांडः राम का बचपन 2. अयोध्याकांडः राम का राज्याभिषेक, | अरण्यकांड: पंचवटी में निवास व शूर्पणखा (रावण की बहन) से भेट, 4. किष्किंधाकांडः राम की शुग्रीव से मित्रता, 5. सुंदरकांड: हनुमान द्वारा सीता को सांत्वना, 6. युद्धकांड: रावण पर राम की विजय (सबसे बड़ा कांड), 7. उत्तरकांड: रावण वध, राम की अयोध्या वापसी, सीता वनवास, बाल्मीकि आश्रम में लव-कुश का जन्म।

विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्यः महाभारत

कृतिः महर्षि वेदव्यास

रचनाकाल: 400 B.C.

चरणश्लोकनाम
प्रथम8,800जय
द्वितीय24,000भारत
तृतीय1,00,000सतसाहस्री संहिता/महाभारत

 भाषाः मूलतः संस्कृत में।

जय का अर्थ: विजय संबंधी संग्रह ग्रन्थ मूलकथाः कौरव और पाण्डवों के युद्ध का विवरण। 

प्रारम्भिक उल्लेखः आश्वलायन गृहसूत्र

विशेषः महाभारत में कुल 18 पर्व हैं। (1. आदि पर्व, 2. सभापर्व, 3. वन । पर्व, 4. विराट पर्व, 5. उद्योग पर्व, 6. भीष्म पर्व, 7. द्रोण पर्व, 8. कर्ण पर्व, 9. शल्य पर्व, 10. सौप्तिक पर्व, 11. स्त्री पर्व, 12. शांति पर्व, 13. अनुशासन पर्व, 14. अश्वमेध पर्व, 15. आश्रमवासी पर्व, 16. मौसल पर्व 17. महाप्रस्थानिक पर्व, 18. स्वर्गारोहण पर्व।) इसमें भीष्म पर्व (6वें पर्व) का भाग गीता है, जिसमें कर्म भक्ति व ज्ञान का संगम मिलता है। इसमें कर्म को सर्वाधिक प्रधानता दी गई है। गीता में ही सर्वप्रथम अवतारवाद का उल्लेख मिलता है।

 महाभारत का तमिल में सर्वप्रथम अनुवाद पेरून्देवनार ने किया जो भारतम् नाम से जाना जाता है। महाभारत का बांग्ला भाषा में अनुवाद अलाउद्दीन नुशरत शाह के समय में हुआ था।

इतिहास (Indian History in Hindi) से संबंधित प्रश्न

1. भारतीय पुरातत्व के जनक कौन थे?

उत्तर – भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ब्रिटिश पुरातत्वशास्त्री विलियम जोन्स द्वारा 15 जनवरी, 1784 को स्थापित एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल (कोलकाता) का उत्तराधिकारी थे। 1788 में इनका पत्र द एशियाटिक रिसर्चेज प्रकाशित होना आरंभ हुआ था और 1814 में यह प्रथम संग्रहालय बंगाल में बना।

2. इतिहास के जन्मदाता कौन थे?

उत्तर – हेरोडोटस (Herodotus), यूनान का प्रथम इतिहासकार व भूगोलवेत्ता था। हेरोडोटस का संस्कृत नाम हरिदत्त था। हेरोडोटस हिस्ट्री (History) शब्द के प्रथम प्रयोगकर्ता थे। इन्होंने वास्तविक इतिहास | लेखन की नींव रखी थी। रोमन दार्शनिक सिसरो ने हेरोडोटस को इतिहास का जनक/पिता (Father of (History) की संज्ञा दी थी।

3. आदि महाकाव्य रामायण के अन्य नाम क्या है?

उत्तर – चतुर्विंशति साहस्री संहिता/ रामचरितमानस

4. महाकाव्य महाभारत के अन्य नाम क्या है?

उत्तर – सतसाहस्री संहिता/ जय संहिता

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