मुग़ल शासक औरंगजेब का इतिहास: Aurangzeb History in Hindi



Aurangzeb History in Hindi (1658 ई.- 1707 ई.)

मुग़ल शासक औरंगजेब ने भारत में कई वर्षो तक राज्य किया। औरंगजेब ने 1658 से 1707 लगभग 49 साल तक शासन किया, अकबर के बाद यही मुग़ल शासक थे, जो इतने लम्बे समय तक शासन किया। औरंगजेब अपने बड़े भाई दारा शिकोह को मारकर राज सिंहासन पर बैठा था। इनकी मौत के बाद [Mughal Emperor] पूरी तरह ध्वस्त हो गया था, और धीरे धीरे ख़त्म होने लगा था। औरंगजेब कट्टरपंथी, पक्के मुसलमान और कठोर किस्म के राजा थे, इसी वजह से औरंगजेब को उसकी प्रजा ज्यादा पसंद नहीं करती थी।

औरंगजेब जीवन का परिचय

जन्म/स्थल (Birth/Place)24 अक्टूबर, 1618 ई. को उज्जैन के दोहद में।
मूल नाम (Original Name)औरंगजेब
पूरा नाम (Full Name)मुइनुद्दीन मुहम्मद औरंगजेब
पिता (Father)[ शाहजहां ]
माता (Mother)मुमताज महल
राज्याभिषेक (Coronation)प्रथम मुगल शासक जो 2 बार राज्याभिषेक किया। पहला: 21 जुलाई, 1658 ई., दूसरा: 15 जून, 1659 ई.।
उपाधिःशाहजहां द्वारा बहादुर की उपाधि मिली
जीवनसाथी (Partner)1. दिलरस बानो बेगम
2. नवाब बाई
3. औरंगाबादी महल
4. उदयपुरी महल
उत्तराधिकारी (Successor)बहादुर शाह I
मृत्यु (Death)3 मार्च, 1707 ई.
मकबरा (Tomb)औरंगाबाद(दौलताबाद) [ मुगल साम्राज्य ]

औरंगजेब का इतिहास – Aurangzeb History in Hindi

औरंगजेब (Aurangzeb) ने सीधे अपने पिता का विरोध करते हुए अपने बड़े भाई दारा शिकोह पर हमला किया। आगरा के लाल किले में बंदी बनाए गए पिता [ शाहजहां ] की सेना पर औरंगजेब ने अधिकार कर लिया, शाहजहां ने अपने जीवन के अंतिम 8 वर्ष ताजमहल के दृश्य के साथ बिताए।

उसका बड़े भाई, दारा शिकोह, और भी कम भाग्यशाली थे। उसे एक बलूच सरदार मलिक जीवन जो दारा शिकोह का मित्र के था, उसके पास भागना पड़ा, लेकिन दारा शिकोह के मित्र ने धोखा दे दिया, इसे औरंगजेब को सौंप दिया, औरंगजेब ने उसे पूरे शहर में अपमानित किया। औरंगजेब ने उसका सिर काट दिया था।

औरंगजेब (Aurangzeb) सिंहासन पर बैठने से पहले ये दक्कन के गवर्नर थे। औरंगजेब आलमगीर नाम से सिंहासन पर बैठा। सम्राट बनने के उपरान्त औरंगजेब ने जनता के आर्थिक कष्टों के निवारण के ‘राहदारी’ (आन्तरिक पारगमन शुल्क) और पानदारी’ (व्यापारिक चुंगियों ) को समाप्त कर दिया। उसने उलेमावर्ग की सलाह के अनुसार इस्लामी परंपरा के अनुसार शासन किया।

उसने नौरोज उत्सव’ ‘Nauroj Utsav’ तथा ‘झरोखा दर्शन’ ‘Jharokha Darshan’ (अकबर द्वारा प्रारंभ) समाप्त कर दिया। उसने राज्य की गैर-मुस्लिम जनता पर पुनः जजिया कर लगा दिया। औरंगजेब ने हिन्दू त्यौहारों को सार्वजनिक रूप से मनाये जाने पर प्रतिबन्ध लगा दिया।

उसने राज्य में सार्वजनिक रूप से नृत्य तथा संगीत पर भी प्रतिबंध लगा दिया यद्यपि व्यक्तिगत जीवन में वह स्वयं एक कुशल वीणा वादक था। अपने व्यक्तिगत चारित्रिक गुणों के कारण औरंगजेब को ‘जिन्दा पीर’ के नाम से जाना जाता था।

उसने 1686 ई. में बीजापुर तथा 1687 ई. में गोलकुण्डा को जीतकर मुगल साम्राज्य में मिला लिया। औरंगजेब के समय में मुगल साम्राज्य क्षेत्रफल की दृष्टि से चरमोत्कर्ष पर था। यह काबुल से लेकर चटगाँव तक और कश्मीर से लेकर कावेरी नदी तक विस्तार था।

औरंगजेब द्वारा किये गये कार्य

औरंगजेब (Aurangzeb) ने अपनी बेगम के आग्रह पर ताजमहल की प्रति का निर्माण किया जिसे बीवी का मकबरा (द्वितीय नाम ताजमहल) के नाम से जाना जाता है। यह औरंगाबाद में स्थित है। इस काला ताजमहलम तथा दक्षिण का ताजमहल उपनाम से जाना जाता है।

औरंगजेब के उत्तराधिकारी

औरंगजेब (Aurangzeb) की मृत्यु 1707 ई में हुई। उसका मकबरा औरंगाबाद में स्थित है। औरंगजेब की मृत्यु के पश्चात जो उत्तर मुगल शासकों में सभी शासक सामान्यत: अयोग्य थे।

1. बहादुर शाह-I (1707 – 1712 ई.)
2. जहांदार शाह (1712 – 1713 ई.)
3. फर्रुखसियर (1713 – 1719 ई.)
4. मुहम्मद शाह(1719 – 1748 ई.) -मिस्र के राजा नादिरशाह ने इसे करनाल के युद्ध (1739 ई.) में हराया था। और मयूर सिंहासन और कोहिनूर हीरा भारत से ले गया था।
5. अहमदशाह(1748 – 1754 ई.)
6. आलमगीर-II (1754 – 1759 ई.)
7. शाहआलमना(1759 – 1806 ई.)- इसने अवध के नवाब शुजाउद्दौला और बंगाल के नवाब मीर कासिम के साथ मिलकर 1764 ई. में अग्रेजों के विरूद्ध बक्सर का युद्ध लड़ा था, But पराजित हो गये थे।
8. अकबर-II(1806 – 1837 ई.)
9. बहादुर शाह-II(1837 – 1857 ई.)

औरंगजेब काल के प्रमख विद्रोह व विवरण

अफगान विद्रोह : – इसका उद्देश्य पृथक अफगान राज्य की स्थापना। रोशनाई नाम धार्मिक संप्रदाय ने पृष्ठभूमि प्रदान किया।
>1667 ई. में अफगान विद्रोही भागू के नेतृत्व में मुगल सूबेदार अमीर खां ने दमन किया।
>1672 ई. में अफरीदी नेता अकमल खां के नेतृत्व में स्वयं को राजा घोषित किया तथा अकमल खा के नेतृत्व में स्वयं को राजा घोषित किया तथा अपने नाम का खुतबा पढ़वाया व सिक्का चलाया ।

जाट विद्रोह : – इसका मुख्य कारणः कृषकों व भूमि विषयक समस्या थी। इस विद्रोह की मुख्य रीढ़ कृषक व काश्तकार थे किंतु नेतृत्व मुख्यत: जमींदारों ने किया।
>1669 ई. में गोकुल के नेतृत्व में तिलपत के युद्ध में जाट पराजित हुए और गोकुल पकड़ा गया।
>1685-88 ई. में राजाराम के नेतृत्व में अधिक संगठित विद्रोह सिकंदरा स्थित अकबर के मकबरे को लूटा गया। औरंगजेब के पौत्र बेदार बख्तऔर बिशनदास (आमेर का राजा) ने दमन किया। सूरजमल को जाटो का अफलातून कहा जाता है।
> 1688 ई. के बाद से राजाराम के भतीजे चूरामन के नेतृत्व में औरंगजेब की मृत्युपर्यन्त विद्रोह करता रहा।

सतनामी विद्रोह : – 1672 ई. में मथुरा के निकट नारनौल धार्मिक संप्रदाय था। ये शुद्ध अद्वैतवाद से सम्बद्ध थे इन्हें मुंडिया कहा जाता था सत्य ईश्वर में विश्वास के कारण ये सतनामी के नाम प्रसिद्ध हुए। इनका मुगलों से विवाद हुआ।

बुदेला विद्रोह : – 1661 ई. में ओरछा के शासक चम्पतराय के नेतृत्व में पराजित होने के बाद आधिपत्य स्वीकार करने के स्थल पर आत्महत्या कर ली।
> 1661-1707 ई. में छत्रसाल ने शिवाजी से विद्रोह की प्रेरणा प्राप्त की थी। 1707 ई. बुंदेलखंड का स्वतंत्र शासक बना।

अंग्रेज़ो का विद्रोह :- 1686 ई. में अंग्रेजों को हुगली से बाहर भगा दिया गया।

राजपूत विद्रोह :- 1679-1709 ई. में राजपूतों के आंतरिक मुद्दों में हस्तक्षेप किया। 1675 ई. में एकमात्र धार्मिक विद्रोह व औरंगजेब के समय का अंतिम विद्रोह था।

औरंगजेब द्वारा मुख्य रूप से तोड़े गए 10 स्मारक हिंदू मंदिरों की सूची –

10 स्मारक हिंदू मंदिर जिन्हें औरंगज़ेब द्वारा नष्ट कर दिया गया था । कई मंदिरो को मुग़ल सम्राट औरंगज़ेब  द्वारा मस्जिद में बदल दिया गया।

1. सोमनाथ मंदिर:

सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple) को शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में पहला ज्योतिर्लिंगों माना जाता है ये गुजरात (Gujarat) के पश्चिमी तट पर महाराष्ट्र में वेरावल के पास प्रभास पाटन में स्थित है। अतीत में कई बार नष्ट और पुनर्निर्माण किया गया, वर्तमान मंदिर को हिंदू मंदिर वास्तुकला की चालुक्य शैली में पुनर्निर्मित किया गया और मई 1951 में पूरा किया गया।

पूर्व-इस्लामिक अरब इस मंदिर में तीर्थयात्रा के लिए आए थे क्योंकि यहां के देवता उनके चंद्रमा देवता का प्रतिनिधित्व करते थे।कहा जाता है कि मंदिर को 17 बार लूटा और नष्ट किया गया था। गजनी के महमूद ने पहले मंदिर को लूटा और फिर अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति अफजल खा और बाद में औरंगजेब ने । आज मंदिर का जीर्णोद्धार कर दिया गया है।

2. कृष्ण जन्मभूमि मंदिर : – कृष्ण जन्मभूमि मंदिर को भी सम्राट औरंगजेब ने नष्ट कर दिया था और केशव देव मंदिर के ऊपर शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण किया गया था।

 3. काशी विश्वनाथ मंदिर:

According to Historians काशी विश्वनाथ मंदिर हजारों वर्षों से अस्तित्व में है। जब लोगों को मंदिर को नष्ट करने के लिए औरंगजेब के आने की खबर मिली, तो मंदिर के मुख्य पुजारी ने कुएं में छलांग लगा दी और ज्योतिर्लिंग को आक्रमणकारियों से बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।

बाद में, यह माना जाता है कि शिव ने पुजारी को मरने से बचाया था। लिंग स्वयंभू है और इसे हटाया नहीं जा सकता, इसलिए शिव ने स्वयं पुजारी को ज्योतिर्लिंग को बचाने में मदद की।

4. विश्वेश्वर मंदिर: – औरंगजेब ने नष्ट कर दिया था और विश्वेश्वर मंदिर की जगह ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण किया गया था।

5. गोविंद देव मंदिर, 6. विजय मंदिर, 7. भीमा देवी मंदिर, 8. मदन मोहन मंदिर, 9 .चौसठ योगिनी मंदिर, 10. एलोरा, त्र्यंबकेश्वर, नरसिंहपुर, और पंढरपुर – Aurangzeb History in Hindi (1658 ई.- 1707 ई.)

FAQ Section

Q.1. किस मुगल शासक ने जजिया कर पुनः किसने शुरू कर दिया था?

Ans. औरंगजेब ने जजिया कर पुनः किसने शुरू कर दिया था मोहम्मद बिन कासिम द्वारा 712 ई. में लगाया गया था और अकबर द्वारा उसको समाप्त कर दिया था।

Q.2. नौरोज उत्सव’ तथा ‘झरोखा दर्शन’ औरंगजेब ने समाप्त कर दिया, किसके द्वारा चलाया गया था?

Ans. नौरोज उत्सव’ तथा ‘झरोखा दर्शन’ अकबर द्वारा प्रारंभ किया था। 

Q.3. जजिया कर क्या था ?

Ans. जज़िया एक प्रकार का धार्मिक कर है। इसे मुस्लिम राज्य में रहने वाली गैर मुस्लिम जनता से वसूल किया जाता है। 

Q.4. औरंगजेब के अन्य नाम क्या था ?

Ans. आलमगीर तथा ‘जिन्दा पीर’ के नाम से जाना जाता था।

Q.5. औरंगजेब ने अपनी बेगम के आग्रह पर ताजमहल की प्रति का निर्माण किया, उसको कहा गया ?

Ans. बीवी का मकबरा (द्वितीय नाम ताजमहल) के नाम से जाना जाता है। यह औरंगाबाद में स्थित है।

Q.6. औरंगजेब ने कितने समय तक मुगल साम्राज्य पर राज्य किया ?

Ans. सन 1658 ई. से 1707 ई. तक ( 49 Yrs.)