1857 का विद्रोह – Revolt of 1857 in Hindi



Revolt of 1857 in Hindi: 1857 का विद्रोह सिपाहियों के असंतोष का परिणाम मात्र नहीं था। वास्तव में यह औपनिवेशिक शासन के चरित्र, उसकी नीतियों, उसके कारण कंपनी के शासन के प्रति जनता के संचित असंतोष का और विदेशी शासन के प्रति उनकी घृणा का परिणाम था।

1857-का-विद्रोह

एक शताब्दी से अधिक समय तक अंग्रेज इस देश पर धीरे-धीरे अपना अधिकार बढ़ाते जा रहे थे, और इस काल में भारतीय समाज के विभिन्न वर्गों में विदेशी शासन के प्रति जन-असंतोष तथा घृणा में वृद्धि होती रही।

यही वह असंतोष था जिसका अंतिम रूप एक जनविद्रोह के रूप में 1857 का विद्रोह ब्रिटिश नीतियों और साम्राज्यवादी शोषण के प्रति जन-असंतोष का उभार था। परन्तु यह आकस्मिक घटना नहीं थी। लगभग एक शताब्दी तक पूरे भारत में ब्रिटिश नीतियों के विरूद्ध तीव्र जन-प्रतिरोध होते रहे थे।

1857 का विद्रोह के प्रमुख केन्द्र व प्रमुख विद्रोही नेता

केन्द्र विद्रोही नेताविद्रोह तिथिदमनकर्ता
दिल्लीबहादुर शाह-II, जफर बख्त खाँ (सैन्य नेतृत्व)11 मई, 1857निकलसन हडसन
कानपुरनाना साहब, तात्या टोपे (सैन्य नेतृत्व)5 जून, 1857कॉलिन कैंपबल
लखनऊबेगम हजरत महल, बिरजिस कादिर4 जून, 1857कॉलिन कैंपबल
झाँसी/ग्वालियररानी लक्ष्मीबाई/ तात्या टोपे4 जून, 1857जनरल हारोज
जगदीशपुरकँवरसिंह, अमरसिंह12 जून, 1857विलियम टेलर व विसेंट आयर
फैजाबादमौलवी अहमदुल्लाजून, 1857कर्नल नील
बरेलीखान बहादुर खांजून, 1857विसेंट आयर
इलाहाबादलियाकत अली6 जून, 1857कर्नल नील
फतेहपुरअजीमुल्ला1857जनरल रेनर्ड

क्रांति का पूर्वाभ्यास

वेल्लोर क्रांति को 1857 ई. की क्रांति का पूर्वाभ्यास कहा जा सकता है। वेल्लोर क्रांति का नेतृत्व बलवंत राव फड़के ने किया था। इस संघर्ष का मूल कारण अंग्रेजों द्वारा भारतीय सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को आहत पहुंचाना था।

10 जुलाई, 1806 में वेल्लोर के भारतीय सिपाहियों ने भीषण क्रांति कर दी और अंग्रेज संतरियों तथा अधिकारियों की हत्या कर दी। वेल्लोर दुर्ग पर मैसूर राज्य का झण्डा फहरा दिया गया और ब्रिटिश राज्य को समाप्त करने की योजना बना ली गयी।

लेकिन भारतीय सिपाही अनुशासनहीन भीड़ के समान थे। इसलिए अंग्रेजी सेना उनके विद्रोह को कुचलने में सफल हो गयी। विफलता के बावजूद भी वेल्लोर क्रांति उस क्रांति की जंजीर की वह प्रथम कड़ी थी, जो 1857 की क्रांति के रूप में प्रकट हुई।

1857 की क्रांति से पूर्व अंग्रेजी शासन के विरूद्ध क्रांतियां

कोली क्रांति (1820), खामोशी क्रांति (1822), बैरकपुर क्रांति (1824), पागलपंथी क्रांति (1825), कच्छ क्रांति (1825), खासी क्रांति (1829), कोल्हापुर क्रांति (1844),खोद क्रांति (1846), संथाल क्रांति (1853), नील क्रांति (1856)।

1857: महत्वपूर्ण तथ्य

1857 के विद्रोह से पूर्व सेना में बंगाल और अवध के सैनिक सर्वाधिक होते थे। 1857 के बाद उनकी संख्या घटाकर पंजाबी और गोरखा सैनिकों की संख्या बढ़ायी गयी।

सर्वप्रथम भारतीय और अंग्रेज फौज आमने-सामने (हिंडन नदी) के तट पर लड़ी थी। 1857 के विद्रोह में सर्वप्रथम, कर्नल फिन्निस’ को गोली मारी गयी थी। अवध के प्रथम चीफ कमिशनर, हेनरी लारेन्स थे।

1857 के विद्रोह में दक्षिण भारत का मद्रास बिल्कुल अछूता रहा। उत्तर भारत के सहारनपुर, चित्तौड़ में आम जनता ने विद्रोह में हिस्सा नही लिया था। कुंवर सिंह एक ऐसे वीर थे जिन्होंने अंग्रेजों को कई बार पराजित किये थे।

1857: महत्वपूर्ण तिथियां

29 मार्च 1857 : कलकत्ता से 16 किमी. दूर बैरकपुर छावनी में 34वीं नेटिव इनफैट्री रेजिमेंट के सिपाही मंगल पांडे ने गाय व चर्बी युक्त कारतूसों को चलाने साफ इंकार कर दिया। इसी रेजिमेंट के अंग्रेज अधिकारी लेफ्टिनेंट बाग और जनरल ह्यूसन की मंगल पांडे ने गोली मारकर हत्या करदी

8 अप्रैल 1857 : इस बगावत के लिए अंग्रेजी हुकुमत ने बैरकपुर में सिपाही मंगल पांडे को 10 दिन पूर्व में ही फांसी दे दी तथा पूरी छावनी को सील कर दिया।

9 मई 1857 : मेरठ छावनी में स्थित एक रेजीमेंट के 85 घुड़सवार सैनिकों ने रगून से आये चर्बी युक्त कारतूसों को हाथ लगाने से भी मना कर दिया, जिसके बाद अंग्रेजी साम्राज्य ने इन सभी सैनिकों को बागी करार देते हुए उन्हें 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए कारागार में डाल दिया।

10 मई 1857 : मेरठ छावनी की तीन रेजीमेंटों के सिपाहियों ने अंग्रेजी हुकुमत से बगावत कर, वहां शस्त्रागार को लूट लिया। इसके बाद इन सैनिकों ने दिल्ली की ओर कूच कर दिया।

11 मई 1857 : दिल्ली पर क्रांतिकारियों का कब्जा तथा अंतिम मुगल सम्राट बहादुरशाह जफर को इस स्वतंत्रता संग्राम का नेता बनाने के बाद बादशाह-ए-हिंदुस्तान के रूप में बहादुरशाह जफर की ताजपोशी की गई।

12-31 मई 1857 : इस दोरान मुजफ्फरनगर, इटावा, मथुरा, लखनऊ, शाहजहांपुर बरेली तथा अलीगढ़ आदि में क्रांति भड़की।

30 मई 1857 : गाजियाबाद में क्रांतिकारियों व अंग्रेजी सेना के बीच हिंडन नदी के तट पर लड़ाई हुआ। अंग्रेजी सेना का कैप्टन ऐंड्रयूज व 11 सार्जेट मारे गये व अंग्रेजी सेना को यहां से पीछे हटना पड़ा।

6 जून 1857 : कानुपर में नाना साहब ने अपने साथी क्रांतिकारियों के साथ क्रांति का बिगुल बजाते हुए कानपुर में डेरा डाला। 7 जून झांसी के किले पर क्रांतिकारियों ने कब्जा कर रानी लक्ष्मीबाई फिर से राज्यरोहण किया।

27 जून 1857 : नाना साहेब ने अंग्रेजी हुकुमत से कानपुर जीत लिया। अंग्रेजी सेनाको कानपुर से भागना पड़ा। 12 जुलाई फतेहगढ़ में टिक्का सिंह व ज्वाला प्रसाद के नेतृत्व में लड रहे क्रांतिकारियों की पराजय।

27 जुलाई 1857 : बिहार के आरा जनपद में कुंवर सिंह ने क्रांतिकारियों के साथ , मिलकर वहां से अंग्रेजी सेना को पराजित कर अपना कब्जा कर लिये। 13 अगस्त अंग्रेजों ने आरा जनपद पर पुनः अपना नियंत्रण स्थापित किया। 13 अगस्त में जगदीशपुर के कुंवर सिंह अंग्रेजी सेना से पराजित। 16 अगस्त में : बिठूर में तात्या टोपे पराजित।

14 सितंबर 1857 : दिल्ली का कश्मीरी गेट पर क्रांतिकारियों ने कब्जा कर लिये तथा बारूद से उड़ा दिए गए। अंग्रेजी हुकुमत ने यहा पर भारी संख्या में गोला-बारूद एकत्र कर रखा था। 20 सितंबर दिल्ली को अंग्रेजों ने फिर से अपने कब्जे में ले लिया।

21 सितंबर 1857 : क्रांतिकारियों के नेता तथा [अंतिम मुगल सम्राट ] बहादुरशाह जफर ने हुमायूं के मकबरे पर अंग्रेजी सेना के सामने आत्मसमपर्ण किये। 22 सितंबर अंग्रेज अधिकारी मेजर हडसन द्वारा बहादुरशाह जफर के पुत्रों की गिरफ्तारी के बाद हत्या करवा दी गयी।

27 अक्टूबर 1857 : तात्या टोपे ने कानुपर पर कब्जा किया। अंग्रेजी सेना को यहां से भागना पड़ा। 6 दिसंबर : तात्या टोपे अंग्रेज अधिकारी कैंपवेल के हाथों पराजित होकर कानपुर से भाग निकले। इसके बाद वह झांसी पहुंचकर रानी लक्ष्मीबाई से जा मिले। यहां पर कालपी का युद्ध हुआ। यहां से भी तात्या को पीछे हटना पड़ा।

1857 के समय भारत

1857 से पूर्व मुद्रित भूमिगत अखबार मेरठ से ‘द मुफसलाइट’ (THE MOFUSSILITE) निकलता था। जिसके संपादकः जॉन लैंग (24 फरवरी, 1846) थे। 1857 के विद्रोह के समय 21857 के झण्डागीत की रचना अजीमुल्ला ने की थी। 21857 के विद्रोह के समय ‘आजाद-ए-पयामी’ क्रांतिकारी अखबार के सम्पादकः मिया बेदार बख्त थे। 1857 के विद्रोह के समय कम्पनी का मुख्य सेनापति: जार्ज एनिसन थे। (Revolt of 1857 in Hindi)

इंग्लैण्ड के प्रधानमंत्रीपार्मस्टन
भारत के गवर्नर जनरललार्ड कैनिंग (1856-58)
भारत के प्रथम वायरायलार्ड कैनिंग (1858-62)
भारत का सम्राट:बहादुरशाह जफर।
सेना का मख्य कार्यालय शिमला
तोपखाना का मुख्य कार्यालयमेरठ

1857 के विद्रोह की विफलता के कारण

1. विद्रोहियों के पास कोई एक रूप विचारधारा नहीं थी। विद्रोहियों के नेतृत्वकर्ता विभिन्न वर्गों, विभिन्न हितों का प्रतिनिधित्व करते थे।
2. विद्रोह को अपनी परिणति तक पहुंचाने के लिए उन्होंने कोई सुनियोजित कार्यक्रम नहीं बनाया था।
3. विद्रोह का प्रसार देशव्यापी न होकर सीमित था। दक्षिण भारत एवं पूर्व भारत के अधिकतर क्षेत्र विद्रोह से अछूते रहे। सिखों ने भी विद्रोहियों का साथ नहीं दिया।
4. भारतीयों में एकता का अभाव था, तथा विद्रोहियों को शिक्षित भारतीयों का सहयोग नहीं मिला।
5. विद्रोहियों को कुशल एवं सुयोग्य नेतृत्व नही मिला, जबकि ईस्ट इंडिया कंपनी को सुयोग्य सेनापतियों की सेवाएं प्राप्त थीं।

भारतीय इतिहासकार मत

वी.डी. सावरकर – 1857 का विद्रोह एक सुनियोजित राष्ट्रीय स्वतंत्रता सग्राम था

डॉ. एस. एन. सेन- ‘जो कुछ धर्म के लिए लड़ाई के रूप में शुरू हुआ, वह स्वतंत्रता संग्राम के रूप में समाप्त हुआ’

डॉ. आर. सी. मजूमदार’– तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय संग्राम न तो पहला ही, न ही राष्ट्रीय तथा न ही स्वतंत्रता संग्राम था’

अशोक मेहता- 1857 के विद्रोह का स्वरूप राष्ट्रीय था

विपिन चन्द्रा – 1857 का विद्रोह विदेशी शासन से राष्ट्र को मुक्तकराने का देश भक्तिपूर्ण प्रयास था। पी.सी. जोशी – ‘यह राष्ट्रीय और सामान्य जनता तक फैला हआग विप्लव था।

दुर्गादास बंधोपाध्याय, 1857 का विद्रोह सिपाही विद्रोह नहीं, अपितु स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए निमित भारतीय जनता का संगठित संग्राम था।

विदेशी इतिहासकार मत

विदेशी इतिहासकार सर जॉन लारेन्स एवं सीले यह पूर्णतया सिपाही विद्रोह था सर जॉन लारेन्स – यदि विद्रोहियों में कोई भी एक नेता होता तो हम सदैव के लिए हार जाते सर जॉन सीले – यदि विद्रोह पूर्णतया देशभक्ति रहित स्वार्थपूर्ण सैनिक विद्रोह था, जिसका न कोई नेतृत्व था न कोई जन समर्थन।

वैजामिन डिजराइली – 1857 को विद्रोह एक राष्ट्रीय विद्रोह था मेंटकाफ व पीवल स्पीयर – ‘यह पुनर्स्थापनावादी आदोलन था’ टी. आर. होम्स – यह सभ्यता एवं बर्बरता का संघर्ष था’। पी. राबंटसन – 1857 का विद्रोह केवल एक सैनिक विद्रोह था जिसका तत्कालिक कारण चर्बी युक्त कारतूस था।

रोज – यह इसाई धर्म के विरूद्ध एक धर्म युद्ध था जम्स आउट्रम और डब्ल्यू. टेलर – यह अंग्रेजों के विरूद्ध हिन्दू-मुसलमानों का षडयंत्र था टी. हीलर – यह एशियाई प्रकार का विद्रोह था रावर्टस एवं मिसेज कूपलैण्ड – यह वस्तुतः मुस्लिम षणयंत्र था। जॉन बूसनार्टन – 1857 का विद्रोह सैनिक विदोहन होकर नागरिक विद्रोह था

FAQ Sections

मंगल पांडे किस रेजिमेंट के सिपाही थे ?

कलकत्ता से 16 किमी. दूर बैरकपुर छावनी में 34वीं नेटिव इनफैट्री रेजिमेंट के सिपाही मंगल पांडे ने गाय व चर्बी युक्त कारतूसों को चलाने साफ इंकार कर दिया।

1857 का विद्रोह एक सुनियोजित राष्ट्रीय स्वतंत्रता सग्राम था, ये किसने कहा ?

वी.डी. सावरकर

1857 का विद्रोह, क्या यह एक प्रगतिशील विद्रोह था?

1857 के विद्रोह का स्वरूप प्रगतिशील नहीं था। इसमें न तो कोई अग्रगामी दृष्टिकोण और न ही भविष्य के लिए कोई सुनिश्चित योजना थी। वस्तुतः इसका स्वरूप पश्चगामी था। यह मध्य कालीन व्यवस्था को पुनः स्थापित करने का प्रयास था।

रानी लक्ष्मीबाई के बचपन का नाम क्या था ?

लक्ष्मीबाई का जन्म वाराणसी में 19 नवम्बर 1828 को हुआ था। उनका बचपन का नाम मणिकर्णिका था 

1857 के विद्रोह के बाद क्या परिवर्तन हुए?

1. सेना का पुनर्गठन 2. कंपनी के शासन का अंत 3. नई शासन-नीति 4. साम्राज्यवादी नीति में परिवर्तन 5. भारत के शासन की बागडोर लंदन में 6. प्रतिक्रियावादी तत्व सक्रिय 7. भारतीय राजनीति में उग्रवाद का उदय 8. मुसलमानों के सांस्कृतिक जागरण पर बुरा प्रभाव 9. भारतीयों को लाभ 10. हिंदू-मुस्लिम वैमनस्य का जन्म 11. भारतीयों और अंग्रेजों के बीच पारस्परिक घृणा की उत्पत्ति।

प्रमुख कमीशन

बाईनाम कमीशन; 1854 में डलहौजी ने जमींदारों एवं जागीरदारों की जांच के लिए । बम्बई में ईनाम कमीशन गठित हुआ। इस कमीशन ने 35 हजार जागीरों की जांच की और लगभग 20 हजार जागीरें जब्त कर लीं। कम्पनी की सेवा में भारतीयों को उच्च पदों पर नहीं रखा गया।
पील कमीशनः 1858 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश सरकार द्वारा सेना के पुनर्गठन के लिए स्थापित पील कमीशन की रिपोर्ट पर सेना में भारतीय सैनिकों की तुलना में रायरोपियों का अनुपात बढ़ा दिया।
रॉयल कमीशनः सैनिक की भर्ती हेतु एक रॉयल कमीशन गठित हुआ तथा बड़ी कुटिलता से फूट डालो राज करो की नीति का अनुसरण करते हुए सेना के रेजिमेंटों को जाति, समुदाय और धर्म के आधार पर विभाजित किया।

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