कंप्यूटर क्या है? कंप्यूटर का फुल फॉर्म?



इस आर्टिकल में हम जानेंगे की कंप्यूटर क्या है? कंप्यूटर का फुल फॉर्म? कंप्यूटर का आविष्कार किसने किया, कंप्यूटर की घटनाये, कंप्यूटर फुल फॉर्म, कंप्यूटर किसे कहते हैं, कंप्यूटर की परिभाषा क्या है?

कंप्यूटर क्या है? कंप्यूटर की परिभाषा क्या है?

“वह इलेक्ट्रॉनिक यंत्र (Electronic Machine), जो किसी प्रोग्राम में होने वाली समस्त गणितीय (Mathematical) एवं तार्किक गणनाओं (Logical Calculation) को तीव्र गति से निष्पादित (Execute) करके, सत्य एवं प्रामाणिक (True and Authentic) परिणाम प्रस्तुत करता है, कंप्यूटर कहलाता है।”

कंप्यूटर क्या है? कंप्यूटर का फुल फॉर्म?
कंप्यूटर क्या है? कंप्यूटर का फुल फॉर्म?

कंप्यूटर अंग्रेजी भाषा के शब्द ‘कंप्यूट’ (Compute) से बना है,जिसका अर्थ है ‘गणना’ (Calculation) करना। कंप्यूटर को हिंदी भाषा में संगणक (Computer) कहते हैं। ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी के अनुसार, “कंप्यूटर शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम वर्ष 1613 में अंग्रेजी लेखक रिचर्ड ब्रेथवेट द्वारा ‘द योंग मैंस ग्लीनिंग्स’ (The Yong Mans Gleanings) नामक पुस्तक में हुआ था।

कंप्यूटर इनपुट माध्यमों (Medium) द्वारा आंकड़ों को ग्रहण कर उन्हें प्रोसेस करता है एवं सूचनाओं को निर्धारित स्थान (Determine Place) पर संग्रहीत (Store) करता है।

वर्तमान समय में प्रयोग किए जाने वाले कंप्यूटर एनालॉग (Analogue) और डिजिटल हैं। कंप्यूटर में मुख्य रूप से तार ट्रांजिस्टर (Cable Transistor) एवं परिपथों (Circuits) का उपयोग किया जाता है, जिन्हें हार्डवेयर कहते हैं। हार्डवेयर को संचालित करने के लिए दिए जाने वाले निर्देश (Instructions) एवं डाटा सॉफ्टवेयर के अंतर्गत आते हैं।

कंप्यूटर का विकास क्रम (Developmental Chronology of Computer) 3000 वर्ष पुराना है। आरंभिक अबेकस (Abacus) का आविष्कार प्राचीन बेबीलोन (Babylon) में 2700-2300 ईसा पूर्व के मध्य हुआ, लेकिन इसके उन्नत (Advance) रूप का विकास चीन (China) हुआ था।

कंप्यूटर का आविष्कार किसने किया?

कंप्यूटर के इतिहास में उन्नीसवीं शताब्दी का प्रारंभिक काल स्वर्णिम युग (Golden Age) माना जाता है। अंग्रेज गणितज्ञ चार्ल्स बैबेज (Charles Babbage) ने एक यांत्रिक गणना यंत्र विकसित किया, जिसका नाम डिफरेंस इंजन (Difference Engine) रखा गया। इस मशीन में गियर (Gears) और शाफ्ट (Shaft) लगे थे और वह भाप (Steam) से चलती थी।

इसके पश्चात् वर्ष 1837 में चार्ल्स बैबेज ने डिफरेंस इंजन का विकसित रूप एनालिटिकल इंजन तैयार किया।

बैबेज का एनालिटिकल इंजन आधुनिक कंप्यूटर का आधार बना। इसीलिए चार्ल्स बैबेज को ‘कंप्यूटर का जनक’ (Father of Computer) कहा जाता है.

कंप्यूटर की घटनाये

  • 1946 – मोचली (Mauchly) और प्रेस्पर (Presper) ने सरकारी अनुप्रयोग (Government Application) के लिए पहले कंप्यूटर UNIVAC का निर्माण किया।
  • 1947 – विलियम शॉकले (William Shockley), जॉन बरडीन (John Bardeen) और बेल (Bell) ने ट्रांजिस्टर (Transistor) की खोज की एवं निर्वात ट्यूब (Vacuum Tube) की जगह ट्रांजिस्टर का उपयोग हुआ।
  • 1953 – ग्रेस होपर (Grace Hopper) ने पहली कंप्यूटर भाषा कोबोल (COBOL) विकसित किया।
  • 1954 – जॉन बैकस (John Backus) के नेतृत्व में फोरट्रॉन (FORTRAN) प्रोग्रामिंग भाषा का विकास हुआ।
  • 1958- जैक किल्बी (Jack Kilby) और रॉबर्ट नायस (Rob- ert Noyce) ने Integrated Circuit का विकास किया, जिसे चिप (Chip) भी कहते हैं।
  • 1964 – डग्लस इंग्लबर्ट (Douglas Engelbart) ने कंप्यूटर में माउस और जीयूआई (GUI = Graphical User In- terface) जैसे तकनीक को प्रयोग में लाया।
  • 1969 – बेल लैब (Bell Lab) में यूनिक्स प्रचालन तंत्र (UNIX Operating System) का विकास हुआ, जो C भाषा में लिखा गया था।
  • 1970 – कंप्यूटर में पहली बार गतिकीय रैम (Dynamic RAM) मेमोरी चिप का उपयोग हुआ।
  • 1971 – आई.बी.एम. ने कंप्यूटर में फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) का उपयोग किया।
  • 1973 – रॉबर्ट मेटकॉफ (Robert Metcalfe) ने ईथरनेट (Ethernet) की खोज द्वारा अलग-अलग कंप्यूटर को अलग-अलग हार्डवेयर से जोड़ा।
  • 1981 – आई.बी.एम. का पहला पर्सनल कंप्यूटर एकार्न (Acom) बना, जिसमें एम.एस. डास एवं प्रचालन तंत्र का उपयोग किया गया था।
  • 1983 – पहला GUI आधारित पर्सनल कंप्यूटर Apple’s Lisa बनाया गया था।
कंप्यूटर का आविष्कार किसने किया

अबेकस (Abacus)

अबेकस (Abacus) तारों का एक फ्रेम होता है। इन तारों में प्लास्टिक (Plastic) या धातु (Metal) के गोले पिरोये रहते हैं। प्रारंभ में अबेकस (Abacus) का उपयोग व्यापारी (Trader) गणनाएं (Calculations) करने के लिए करते थे। यह यंत्र (Machine) अंकों (Digits) को जोड़ने, घटाने, गुणा या भाग करने के लिए प्रयोग किया जाता था।

एडिंग मशीन (Adding Machine)

17वीं शताब्दी (Century) में फ्रांस के गणितज्ञ (Mathematician) ब्लेज पास्कल (Blaise Pascal) ने एक यांत्रिक अंकीय गणना मशीन (Mechanical Digital Calculation Machine) विकसित (Develop) किया। इस मशीन (Machine) को एडिंग मशीन (Adding Ma- chine) कहा गया, क्योंकि यह मशीन (Machine) केवल जोड़ या घटा (Addition and Substraction) सकती थी।

यह मशीन घड़ी (Watch) और ओडोमीटर (Odometer) के सिद्धांत (Principle) पर कार्य करती थी। इसमें कई दांतेयुक्त चकरियां (Toothed Wheels) थीं, जो घूमती रहती थीं। चकरियों (Wheels) के दांतों पर 0 से 9 तक के अंक छपे रहते थे। प्रत्येक चकरी (Wheels) का एक स्थानीय मान (Place Value) होता था, जैसे-इकाई (Unit), दहाई (Ten), सैकड़ा (Hundred) आदि। प्रत्येक चकरी स्वयं से पिछली चकरी के एक चक्कर लगाने पर एक अंक घूमती थी।

ब्लेज पास्कल एडिंग मशीन (Blaise Pascal Adding Machine) को पास्कलाइन (Pascaline) कहते हैं। वर्तमान में कार या बाईक के स्पीडोमीटर (Speedometer) में इसी यंत्र (Machine) का प्रयोग किया जाता है।

पंच कार्ड (Punch Card)

वर्ष 1805 में फ्रांसीसी बुनकर (Weaver) जोसेफ जेकार्ड (Joseph Jacquard) ने कपड़े बुनने (Weaving) के लिए ऐसे यांत्रिक (Me- chanical) करघे (Loom) का आविष्कार (Invention) किया जो कपड़ों में स्वतः ही अभिकल्पन (Design) कर देता था।

इस लूम की विशेषता थी कि यह कपड़े के अभिकल्प (Design) को कार्ड बोर्ड (Card board) के छिद्रयुक्त (Perforated) पंच कार्डों से होत नियंत्रित करता था तथा पंच कार्ड पर छिद्रों की उपस्थिति या अनुपस्थिति .द्वारा धागों को निर्देशित करता था।

होलेरिथ सेंसस टेवुलेटर (Hollerith Census Tabulator)

वर्ष 1890 में अमेरिका की जनगणना (Census) के लिए एक यंत्र (Machine) बनाया गया, जिसमें पंच कार्डों (Punch Cards) को विद्युत (Electric) द्वारा संचालित (Operated) किया गया।

वर्ष 1896 में होलेरिथ (Hollerith) ने पंच कार्ड (Punch Card) यंत्र (Machine) बनाने की ‘टेबुलेटिंग मशीन कंपनी’ (Tabulating Machine Company) बनाई। वर्ष 1911 में इस कंपनी का नाम बदलकर ‘कंप्यूटर टेबुलेटिंग रिकॉर्डिंग कंपनी’ (Computer Tabu lating Recording Company) कर दिया गया। वर्ष 1924 में इस कंपनी का नाम बदलकर आई.बी.एम. (I.B.M.) कर दिया गया। वर्तमान में यह विश्व (World) की कंप्यूटर हार्डवेयर (Computer Hardware) एवं सॉफ्टवेयर (Software) निर्माण (Production) की सबसे बड़ी कंपनी है।

जेड 2 (Z)

वर्ष 1939 में, जर्मन अभियन्ता (Engineer) कोनराड ज्यूस (Konrad Zuse) ने पहली बार Z, कंप्यूटर का पेटेंट तैयार किया एवं वर्ष 1941 में Z का उन्नत संस्करण (Advance Version) Z, प्रस्तुत किया गया। यह पहला प्रोग्रामेबल, ऑटोमेटिक कंप्यूटर (Programmable Automatic Computer) था। Z, आकार में बहुत बड़ा था एवं इसका प्रयोग जर्मन एयरक्राफ्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (German Aircraft Re- search Institute) में विंग फ्लटर (Wing-Flutter) सांख्यकीय विश्लेषण (Statistical Analysis) में किया जाता था।

कोलॉसस (Colossus)

वर्ष 1943 में, इंग्लैंड के टॉमी फ्लॉवर्स (Tommy Flowers) एवं उनके कुछ साथियों ने मिलकर इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर (Electronic Digital Computer) कोलॉसस (Colossus) का निर्माण किया, जो द्वितीय विश्व युद्ध (Second World War) के समय जर्मनी में इन्क्रिप्टेड संदेशों (Encrypted Messages) को पढ़ने के काम आया था। 

मार्क-1 (MARK-1)वर्ष 1944 में आई बी.एम. (I.B.M.) के अभियन्ता (Engineer) हॉवर्ड आईकेन (Howard Aiken) ने एक यंत्र (Machine) को विकसित (Develop) किया, जिसका नाम ऑटोमेटिक सिक्वेंस कंट्रोल्ड कैलकुलेटर (Automatic Sequence Controlled Calculator) रखा गया।

बाद में इस यंत्र (Machine) का नाम मार्क-1 (MARK-1) रखा गया। यह विश्व का सबसे पहला इलेक्ट्रो-मैकेनिकल कंप्यूटर (Electro- mechanical Computer) था। इसमें 500 मील लंबाई (Length) के तार (Wire) तथा 30 लाख (Three Million) इलेक्ट्रॉनिक कनेक्शन (Electronic Connection) थे।

मैनचेस्टर बेबी (Manchester Baby)

विश्व का पहला स्टोर-प्रोग्राम कंप्यूटर (Stored-Program Com- puter ) मैनचेस्टर बेबी (Manchester Baby) था। इसका निर्माण वर्ष 1948 में विक्टोरिया यूनिवर्सिटी (Victoria University) के फ्रेडरिक सी. विलियम्स (Frederic C. Williams), टॉम किलबर्न (Tom Kilburn) और ज्योफ टूथिल (Geoff Toothill) द्वारा किया गया था।

वर्ष 1990 का समय कंप्यूटर के लिए बहुत महत्वपूर्ण था। इसी वर्ष HTTP (Hyper Text Transfer Protocol) का विकास हुआ। वर्तमान में प्रत्येक वर्ष कंप्यूटर में नई-नई तकनीक की खोज हो रही है और उनका उपयोग हो रहा है।

भारत में कंप्यूटर का विकास (Development of Computer in India)

HEC-2M

विश्व में कंप्यूटर प्रौद्योगिकी (Computer Technology) का प्रादुर्भाव (Advent) तो 1940 के दशक (Decade) के अंतिम वर्षों (Last Years) में ही हो गया था, लेकिन भारत ने अपना पहला कंप्यूटर वर्ष 1956 में 10 लाख रुपये में खरीदा।

इस कंप्यूटर का नाम HEC-2M था तथा इसे कोलकाता स्थित ‘भारतीय सांख्यिकीय संस्थान’ (Indian Statistical Institute) में स्थापित (Established) किया गया। इस कंप्यूटर ने योजना आयोग (Planning Commission) की वार्षिक एवं पंचवर्षीय योजनाओं के निरूपण (Formulation) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह कंप्यूटर भारत के अगली पीढ़ी (Next Genera- tion) के कंप्यूटरों के अभिकल्पन (Design) में भी उपयोगी साबित हुआ।

TIFRAC

भारत में प्रथम ऑटोमेटिक इलेक्ट्रॉनिक कैलकुलेटर TIFRAC था, जिसका पूरा नाम टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च ऑटोमेटिक कैलकुलेटर है। इस मशीन को पहली बार 1955 में शुरू किया गया और 1960 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने इसका नाम TIFRAC रखा, परंतु पूर्ण रूप से इस मशीन का उपयोग 1965 में किया गया।

सिद्धार्थ (Siddharth)

भारत में निर्मित पहला कंप्यूटर सिद्धार्थ था, जिसका निर्माण इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (Electronic Corporation of India) द्वारा वर्ष 1967 में किया गया था। इस कंप्यूटर में सर्वप्रथम सिलिकॉन (Si) से बनी चिप (Chip) का उपयोग किया गया था।

परम (Param)

अमेरिका द्वारा भारत को ‘क्रे (Cray)’ सुपर कंप्यूटर (Super Computer) देने से इंकार करने के बाद 1980 के दशक के अंत तक भारत में सुपर कंप्यूटर (Super Computer) कार्यक्रम का शुभारंभ (Launch) हुआ। सुपर कंप्यूटिंग ( Super Computing) के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (Self Reliance) प्राप्त करने के उद्देश्य (Purpose) से वर्ष 1988 में ‘प्रगत संगणन विकास केंद्र’ (C-DAC Centre for Development of Advanced Computing) की स्थापना की गई।

परम, पुणे स्थित सी-डैक द्वारा अभिकल्पित (Design) एवं निर्मित सुपर कंप्यूटरों की एक श्रृंखला है। परम 8000 परम श्रृंखला (Series) का पहला सुपर कंप्यूटर था। इसका विकास वर्ष 1991 में किया गया था। परम श्रृंखला का नवीनतम सुपर कंप्यूटर (Latest Super Computer) परम युवा II है। यह अधिकतम 532 टेराफ्लाप्स (TFLOPS) की गति से कार्य निष्पादित (Execute) करने में सक्षम है। प्रौद्योगिकीय प्रतिबंध के परिणामस्वरूप क्रे सुपर कंप्यूटर से वंचित किए जाने के बाद भारत में स्वदेशी सुपर कंप्यूटर और सुपर कंप्यूटिंग प्रौद्योगिकी के विकास के लिए एक कार्यक्रम शुरू किया गया। सुपर कंप्यूटर परमाणु हथियारों के विकास हेतु सहायता में सक्षम माने जाते हैं।

परम युवा-II (Param Yuva-II)

परम युवा-II पहला भारतीय सुपर कंप्यूटर है, जिसने 500 से अधिक टेराफ्लाप्स (Teraflops) की गति प्राप्त की है तथा बिजली क्षमता के संदर्भ में यह नवंबर 2012 तक विश्व के शीर्ष ग्रीन 500 सुपर कंप्यूटरों की सूची में 33वें स्थान पर रहा। यह कंप्यूटर भारत में भविष्य के Peta Flop रेंज के सुपर कंप्यूटर के निर्माण की दिशा में एक कदम है।

तत्कालीन केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने 19 सितंबर, 2016 को IIT गुवाहाटी में सुपर कंप्यूटर परम ईशान का उद्घाटन किया। परम ईशान भारत का पहला सुपर कंप्यूटर है, जिसने 1TFLOP की गति सीमा को पार किया।

सी-डैक (C-DAC)

प्रगत संगणन विकास केंद्र (Center for Development of Ad- vance Computing) समानांतर संसाधन प्रौद्योगिकी पर आधारित सुपर कंप्यूटिंग के क्षेत्र में भारत की राष्ट्रीय पहल है। इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य 100 मेगाफ्लॉप से भी अधिक उच्च कार्य निष्पादन (Perfor- mance) वाले कंप्यूटरों का अभिकल्पन (Design) एवं विकास तथा वाणिज्यिक (Commercial) स्तर पर उत्पादन करना है।

समीर (SAMEER)

समीर का पूर्ण रूप-सोसायटी फॉर एप्लाइड माइक्रोवेव इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग एंड रिसर्च (Society for Applied Microwave Elec- tronics Engineering & Research) है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी (Technology) विभाग (Department), भारत सरकार द्वारा मुम्बई में प्रयोगशाला ‘समीर (SAMEER)’ की स्थापना वर्ष 1984 में की गई। यह टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फण्डामेन्टल रिसर्च (Tata Institute of Fundamental Research), मुम्बई में वर्ष 1977 में स्थापित विशेष माइक्रोवेव उत्पादन इकाई (Special Microwave Production Unit) की एक उप-इकाई (Sub-Unit) है, जो माइक्रोवेव प्रौद्योगिकी (Technology) और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक (Electromagnetic) प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सक्रिय है।

कंप्यूटर का फुल फॉर्म?

Ans. कॉमन ऑपरेटिंग मशीन पर्पसली यूज्ड फॉर टेक्नोलॉजिकल एंड एजुकेशनल रिसर्च

कंप्यूटर का आविष्कार किसने किया?

Ans. चार्ल्स बैबेज

भारतीय सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क्स

भारत में सॉफ्टवेयर निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वर्ष 1991 में संचार (Communications) एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Minis- try of Information Technology) भारत सरकार द्वारा भारतीय सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क्स की स्थापना की गई।

Leave a Comment